आइसक्रीम सबसे पहले किस देश में बनाई गई थी? जानिए

सबसे पहले चौबिस सौ वर्ष पूर्व ईरान में आइसक्रीम का निर्माण हुई थी। ऊपर से नोक दार कोणीय आकृत्ति जैसी छत के नीचे ठन्डे गहरे तहखाने में ईरानियों द्वारा सर्दियों में एकत्रित बर्फ से आईस्क्रीम बनाई गई थी।

इस तहख़ाने को जिन चीज़ों से बनाया गया है, उससे ये तपते रेगिस्तान में भी गर्म नहीं होता था। इसका फ़ायदा ये होता था कि यहां बर्फ़ जमाकर पूरे साल रखी जा सकती थी। हालांकि, केवल बर्फ़ से तो आइसक्रीम बनती नहीं।

कहां से आया फ़ालूदा

अब आप से दूसरा सवाल। क्या आपने फ़ालूदा खाया है? कुल्फ़ी के साथ कई बार खाया होगा। वो नूडल्स जैसे पतली लेकिन ठंडी सी चीज़। ये फ़ालूदा ईरान से ही आया है। इसका नाम भी फ़ारसी ही है, जो हम हिंदुस्तानियों ने अपना लिया। ईरान के लोग इसी फ़ालूदा को 2 हज़ार साल से भी ज़्यादा पुरानी आइसक्रीम कहते हैं।

इसे स्टार्च, शीरे और बर्फ़ को मिलाकर बनाया जाता है। ईरान के यज़्द इलाक़े में आज भी बहुत सी दुकानें हैं, जो परंपरागत तरीक़े से आइसक्रीम यानी फ़ालूदा बनाते हैं। ईरान के इस्फ़हान इलाक़े में भी परंपरागत तरीक़े से आइसक्रीम बनाई जाती है। स्थानीय दुकानदार आइसक्रीम बनाने की मशीनों के आने से पहले का क़िस्सा सुनाते हैं।

कैसे बनती थी आइस्क्रीम

पुराने ज़माने के ईरान में, पहले बड़े से बर्तन में बर्फ़ रखी जाती थी और छोटे से बर्तन में दूध। दूध को मथते हुए उसमें बर्फ़ को डालते हुए, उसे जमाया जाता था। धीरे-धीरे दूध टुकड़ों में जमने लगता था। फिर पूरा दूध जम जाता था।

ईरान में आज के आइसक्रीम पार्लर वाले कहते हैं कि ये बहुत लंबी और थकाने वाली प्रक्रिया थी। तो, धीरे-धीरे आइसक्रीम बनाने का ये पुराना तरीक़ा ईरान के लोगों ने छोड़ दिया। हालांकि, ये हुनर मरा नहीं। ये दूसरे देशों के लोगों ने ईरान से सीख लिया।

इसी ईरानी तरीक़े से आइसक्रीम बनाकर इटली में इसका कारोबार शुरू किया गया। यही वजह है कि जब हम ने लोगों से पूछा कि आइसक्रीम सबसे पहले कहां बनी, तो कई लोगों का जवाब इटली था। मगर, ईरान के लोग अपने देश को ही आइसक्रीम का जन्मस्थान बताते हैं।

ईरान में आज मशीनों से ही आइसक्रीम बनाई जाती है। आम तौर पर इसमें भेड़ का दूध इस्तेमाल होता है। इसमें चीनी, केसर और गुलाबजल मिलाया जाता है। इस्फ़हान के स्थानीय दुकानदार कहते हैं कि ईरान और अमेरिका के लोग मोटापा बढ़ाने वाली मीठी आइसक्रीम पसंद करते हैं। वहीं, यूरोप के रहने वाले कम फैट और चीनी वाली आइसक्रीम के मुरीद हैं।

सारी चीज़ें मिलाकर पहले आइसक्रीम जमाई जाती है। फिर इसे ड्रायर में रखा जाता है। ड्रायर का तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस होता है। ये आइसक्रीम को और सुखाकर कड़ा बना देता है। ताकि वो जल्दी पिघले नहीं। ड्रायर से निकालकर, इसे टुकड़ों में काटकर फिर बेचा जाता है।

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