आयुर्वेद के मतानुसार एक स्वस्थ व्यक्ति को 24 घंटे में कितनी बार पेशाब जाना चाहिए?

डॉ जेनिफर शू के अनुसार एक व्यस्क आदमी हर दो से ढाई घंटे में टॉयलेट पेशाब के लिए जाता है यानि वो 24 घंटे में 4–8 बार टॉयलेट पेशाबजाता है। इसलिए आपको पूरे दिन में इतनी बार ही टॉयलेट पेशाब जाना चाहिए। अगर आप इससे ज्यादा या कम बार टॉयलेट पेशाब जाते हैं तो ध्यान देना चाहिए .

यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज और डाइजेस्टिव और किडनी डिजीज के अनुसार एक व्यस्क एक दिन में दिन के समय डेढ क्वार्टर यानि 1.4 लीटर यूरिन उत्पादित करता है। हालांकि शरीर 2 लीटर तक भी यूरिन प्रोड्यूस कर सकता है। अगर आपको लगता है कि आपको पेशाब को लेकर कई दिक्कत है तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। कई लोग पेशाब आने पर पर भी नहीं जाते हैं जो आपके लिए बड़ी बीमारी का कारण बन सकते हैं। बता दें कि जितना लंबे समय तक आप पेशाब को रोककर रखेगें, आपका ब्‍लैडर बैक्‍टीरिया को अधिक विकसित कर कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम का कारण बन सकता है. इसके अलावा किडनी फेल होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए समय समय पर पेशाब जाना जरुरी है।

आम तौर पर लोग एक दिन में 4–7 बारे पेशाब करते हैं।निर्भर करता है व्यक्ति के खानपान और सेहत दिनभर की दिनचर्या मे प्रचुर मात्रा पानी पिए लगबग 3 लीटर..

लखनऊ में हुई एसपीजीआई में अतंरराष्ट्रीय यूरोलॉजी मीट डॉ. दास गुप्ता..अगर आप 24 घंटे में 8 बार से ज्यादा पेशाब जाते हैं तो यह किसी बड़ी बीमारी की ओर इशारा हो सकता है। यह कहना है दुनिया के जाने माने यूरोलॉजिस्ट्स का, जो शुक्रवार को एसजीपीजीआई लखनऊ में आयोजित इंटरनेशनल यूरोलॉजी मीट में शामिल हुए।

उन्होंने बताया कि बार-बार पेशाब जाना ओवर एक्टिव ब्लेडर का लक्षण हो सकता है, जो किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है। यूरो मीट में इंपीरियल कॉलेज हेल्थ केयर लंदन से आए डॉ. रानन दास गुप्ता ने ओवर एक्टिव ब्लेडर के बारे में जानकारी देते हुए इससे संबंधित समस्याओं को सामने रखा।

उन्होंने ने बताया कि ओवर एक्टिव ब्लेडर की वजह से किडनी को नुकसान पहुंचता है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि ब्लेडर को ठीक रखा जाए। वहीं, पीजीआई में हर महीने दर्जनों ऐसे मामले आ रहे हैं, जिनमें ओवर एक्टिव ब्लेडर की वजह से संक्रमण और किडनी को नुकसान हो रहा है।

उन्होंने ने कहा कि आमतौर पर दिन भर में एक सामान्य व्यक्ति को सामान्य मौसम में 3 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसमें 1 से डेढ़ लीटर पानी हमारा शरीर उपयोग कर लेता है।

बचा हुआ पानी पेशाब के जरिये निकल जाता है। लघुशंका कब करनी है, इसके लिए हमारे रीढ़ में मौजूद नर्व दिमाग को संकेत भेजती हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब यह संकेत बार-बार आने लगे।

सामान्य तौर पर दिन भर में चार से आठ दफा यह संकेत दिमाग को पहुंचनी चाहिए। यानी ऐसे व्यक्ति का यूरिन सिस्टम सही काम कर रहा है, लेकिन इससे अधिक हो जाए तो यह ओवर एक्टिव ब्लेडर का संकेत है और इसका इलाज करवाना जरूरी हो जाता है।

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