इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने के क्या फायदे और नुकसान हैं? जानिए

जिस तरह देश में प्रदुषण लगातार बढ़ रहा है ऐसे में इलेक्ट्रिक स्कूटर काफी बेहतर होते हैं प्रदुषण को रोकने के लिए, इतना ही नहीं जिन लोगों को शिकायत थी की इनकी स्पीड कम है और चार्ज होने में कम समय लगता है तो आपको बता दें की इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने वाली इन कंपनियों ने ये शिकायत भी दूर कर दी है।

आने वाले कुछ वर्षों में देश के ऑटो सेक्टर में इलेक्ट्रिक वाहनों का ही दबदबा रहेगा। इसे देखते हुए ऑटो कंपनियां भी अब इस ओर ज्यादा ध्यान देने लगी हैं। बेशक इलेक्ट्रिक वाहन देश में तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण पर लगाम लगाने का काम करेगा। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों के जहां कुछ फायदे हैं वहीं इसके कुछ नुकसान भी हैं जिसका असर भी आम आदमी पर पड़ना तय है।

प्रदूषण से आजादी: पेट्रोल और डीजल वाहनों से निकलने वाले धुंए से हम सभी परेशान हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाना ही सबसे बेहतर माना जा रहा है क्योंकि इनके इस्तेमाल से पॉल्यूशन नहीं होता और वातावरण साफ-सुथरा रहता है।

वायु प्रदूषण से मिलेगी निजात: आजकल सड़कों पर हमें ट्रैफिक की समस्या से हर रोज दो चार होना पड़ता है। जाम के अलावा ट्रैफिक के कारण बढ़ता शोर भी हमारी सेहत पर नकारात्मक असर डालता है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहन हमें इस शोर से भी आजादी दिला सकते हैं। चूंकि इलेक्ट्रिक वाहनों में बैट्ररी लगी होती है इसलिए पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में ये ज्यादा शोर नहीं करते। ऐसे में इन्हें चलाने समय आप रिलैक्स रह सकते हैं।

किफायती: पेट्रोल और डीजल के दाम इन दिनों तेजी से बढ़ रहे हैं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 80 के पार जा पहुंची है। ऐसे में बैटरी से चलने वाहन किफायती साबित हो सकते हैं। आंकड़ों की माने तो टू-व्हीलर्स की औसतन रनिंग कॉस्ट 10 पैसे प्रति किलोमीटर की होती है। जबकि फोर-व्हीलर्स इनसे थोड़े से महंगे होते हैं। मगर इलेक्ट्रिक व्हीकल इन दोनों से ही किफायती होते हैं। इतना ही नहीं इनमें इंजन लुब्रिकेंट और ऑइल की भी जरूरत नहीं पड़ती ऐसे में काफी सारे पैसों की बचत भी हो जाती है।

बेहतर बैलेंस: इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी बीच में होती है जिससे बैलेंस अच्छा बना रहता है और राइड करने में भी दिक्कत नहीं आती। इतना ही नहीं इलेक्ट्रिक वाहनों के सस्पेंसन थोड़े बेहतर होते हैं जिनकी मदद से खराब रास्तों पर भी कोई दिक्कत नहीं होती है।

इलेक्ट्रिक स्कूटर के नुकसान

रिचार्ज स्टेशनों की कमी: देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इस्तेमाल पर तेजी से जोर दिया जा रहा है लेकिन उस हिसाब से देश में चार्जिंग स्टेशनों की पर्याप्त उपलब्धता फिलहाल सुनिश्चित नहीं हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहन को खरीदना तो आसन होगा लेकिन इन्हें चार्ज करने में दिक्कते आएंगी। ऐसे में कहा जा सकता है कि सरकार को फिलहाल इस तरफ ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

लम्बी दूरी करने में होगी दिक्कत: औसत फोर व्हीलर जहां फुल चार्ज में 160 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं तो वहीं टू-व्हीलर्स करीब 60-70 किलोमीटर तक ही चल पाते हैं ऐसे में अगर आपको लम्बी दूरी तय करनी हो तो आपको एक बार सोचना पड़ेगा।

फास्ट चार्जिंग का न होना: पेट्रोल और डीजल वाहनों में फ्यूल भरने में 4 से 5 मिनट लगते हैं। जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ ऐसा नहीं है, बैटरी को फुल चार्ज होने काफी समय लगता है जिससे काफी समय खराब होता है। हालांकि अभी फास्ट चार्जिंग वाली गाड़ियां उपलब्ध नहीं हैं लेकिन कंपनियां इस ओर काम कर भी रही हैं।

पावर की कमी: इलेक्ट्रिक वाहनों में पावर की कमी भी देखने को मिलती है। साथ ही इनकी टॉप स्पीड भी अभी काफी कम है। मौजूदा ई- टू व्हीलर की रफ्तार 25kmph है जबकि बहुत ही कम ऐसे मॉडल हैं जिनकी स्पीड 40kmph से ज्यादा है। तो ये भी कमज़ोर पहलू हैं और कंपनियों को इस ओर अभी काम करने की जरूरत हैं

री-सेल वैल्यू का कम होना: इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे बड़ी खामी उनकी री-सेल वैल्यू का काफी कम होना है। इतना ही नहीं इनमें लगी मोटर की लाइफ भी करीब 7-8 साल ही होती है इसके अलावा ओवरचार्ज्ड होने पर इनकी बैटरी लाइफ कम होती हैं।

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