एकदिन में 24 घण्टे ही क्यों होते हैं? 23 घंटे क्यों नहीं? जानिए कारण

हमारी पृथ्वी अन्य ग्रहों की भांति सूर्य के चारों और घूम रही है और चारों और घूमते घूमते अपने आप मे भी अपने अक्ष पर घूम रही है. इस वाक्य को फिर समझे कि एक तो पृथ्वी पूरा चक्कर सूर्य के चारों तरफ लगा रही है, और चारों तरफ चक्कर लगाते लगाते अपने आप मे भी घूम रही है.

पृथ्वी अपने अक्ष (अपने आप ) मे घूमने में 24 घंटे का समय लेती है, जिसे हम एक दिनांक(एक दिन) मान लेते हैं। तो इस तरह पृथ्वी के अपने आप मे एक चक्र पूरा होने पर एक दिन पूरा हो जाता है जो की 24 घंटे का होता है.

जैसा की मेने ऊपर बताया की अपने अक्ष पर घूमने के साथ साथ पृथ्वी सूर्य के चारों और भी घूम रही है. सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने में पृथ्वी 365 दिन 6 घंटे का समय लेती है। अब जो 6 घंटे है इसका कुछ एडजस्ट करने का हिसाब किताब बनता नहीं तो एक साल को 365 दिन का ही मान लिया जाता है. अब जो हर साल 6 घंटे बच जाते है तो चार साल बाद इन 6 घंटों को चार बार जोड़ने पर 24 घंटों का पूरा एक दिन बन जाता है,

इसलिए हर चार साल बाद लौंद वर्ष (leap year) आता है जब फरवरी महीने मे एक दिन बढ़ा कर जोड़ देते हैं ओर हर चार वर्ष बाद 29 फरवरी नामक दिनांक के दर्शन करते हैं। बस सभी समस्याओं की जड़ यह 29 फरवरी ही है। इसके कारण प्रत्येक चौथा वर्ष 366 दिन का हो जाता है।

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