ऐसा कौनसा व्यक्ति है जो रामायण तथा महाभारत दोनों में उपस्थित रहा है?

ऐसे बहुत सारे चरित्र है, जो रामायण तथा महाभारत काल में थे. जिन्होंने दोनों में भाग लिया ऐसे भी व्यक्ति थे. इनमे से कुछ निम्न है।

महावीर पवन पुत्र हनुमान. अर्जुन के रथ कि ध्वजा पर बैठकर उसकों संरक्षण डे रहे थे. महाबली भीम के अभिमान का मर्दन किया. रामायण में महावीर हनुमान का कार्य हर किसी कि जुबान पर है।

गुरु परशूराम जी. राम जी से राजा जनक के राजमहल में आयोजित धनुष भंग और सीता स्वयंवर में अपनी शीलता खोकर महर्षि परशुराममहाभारत में देवव्रत भीष्म और महाबली कर्ण को धनुर्विद्या देने और भीष्म से युद्ध करके अपना अपमानित होने तथा कर्ण को श्राप देने के कारण चर्चा में रहे।

मय दानव. मय दानव रामायण में भी थे और इनके पुत्र मायावी और दुंदभि का वध किया तथा महाभारत में मय दानव ने अर्जुन से खांडव प्रस्थ में जान बख्श देने के बदले में इंद्रप्रस्थ का निर्माण किया और इस विशेष महल बनाया जिसमे पांडवो ने राजसूय यज्ञ आयोजित किया और शिशुपाल वध हुआ।

महाराजा विभीषण : रावण वध के उपरांत विभीषण लंका के राजा बने और राम जी अनुकम्पा से राज हि करते रहे. महाभराट काल में भी लंका में राजा थे. महाराज युधिष्ठिर के अश्वमेध यज्ञ में भेंट आदि भेजकर पाण्डव नरेश को खिश किया।

जामवंत : रामदल में हनुमान जी को निर्देशन देने और सीता खोज मेंहत्वपुर्ण भूमिका तथा राम रावण लंका युद्ध में मेघनाद को पटकने वाले जामवंत जी महाभारत काल में श्रीकृष्ण सेयुद्ध में भिड़े और 27 दिन तक लगातार युद्ध करके उन्हें भगवान राम का अवतार समझ कर अपनी बेटी जामवंती का विवाह कर चर्चा में रहे. जामवंती श्रीकृष्ण कि आठ पटरानियों में से एक थी. इनके पुत्र साम्ब भी अपनी कारगुजारियों से द्वारिका में चर्चित रहते थे. साम्ब का विवाह दुर्योधन कि पुत्री लक्ष्मणा से हुआ था।

शिव. रामायण मद भी थे और महाभारत में भी. अर्जुन से किरत बनकर युद्ध कर उसे हराया और उससे प्रशन्न हो पशुपति अस्त्र भी प्रदान किया।

देवराज इंद्र. राम जी के लिए लंका युद्ध में रावण के विरुद्ध अपना रथ भेजा अपने सारथी के साथ तथा महाभारत में अर्जुन के पिता बने कुंती को प्रशन्न हो पुत्र दिया. कर्ण से अर्जुन कि रक्षा हेतु शक्तियां दान में ब्राह्मण बनकर ले लि. कृष्ण ब्जग्वान से अर्जुन कि रक्षा करने का वचन लिया. अर्जुन को स्वर्ग बुलाकर सभी तरह के देवास्त्र दिलवाये और शिक्षा दी।

सुर्य देव. कर्ण के पिता थे. सुर्य ने कर्ण को इंद्र के छल के बारे में पहले हि सूचित कार दिया था. कुंती कि आराधनासे खुश होकर कर्ण पुत्र दिया।

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