कार किराये वाली कंपनियां कारों को क्यों बेचती हैं? जो केवल एक या दो साल पुरानी होती हैं और 20 हजार मील से कम चली होती हैं?

कार किराये पर देने वाली कम्पनियां कार निर्माताओं से ‘वापिस खरीद’ की सुविधा के अंतर्गत कारों के बेड़े खरीदती हैं | 1990 के दशक की शुरुआत में जब मैं ‘बजट’ कम्पनी के लिये काम कर रहा था, तब वापिस खरीद का मापदण्ड 15,000 मील था |

ओलों या बाढ़ से क्षति, टक्कर से क्षति, आदि जैसी अयोग्यताएं कीमत में कुछ कमी ले आती थी | 15,000 मील के निकट पहुंचने पर कारों को आटो नीलामी में बेचा जाता था | यदि विक्रय कीमत प्रतिबद्ध वापिस खरीद की कीमत से कम होती तो निर्माता बाकी की भरपाई कर्ता था |

इस प्रकार की सुविधा कार किराये पर देने वाली कम्पनियों और कार निर्माताओं, दोनों के लिये लाभदायक होती है | कार किराये पर देने वाली कम्पनियां अपने ग्राहकों को नयी गाड़ी की सवारी कराती हैं, और निर्माताओं को अपनी गाड़ियों के मॉडलों की टेस्ट ड्राइव और ग्राहकों में exposure का लाभ मिलता है |

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