किसके कहने पर देश ने एक वक्त का खाना छोड़ दिया था? जानिए उनका नाम

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महान देशभक्त, त्याग कि मूरति, महात्मा गाँधी के सच्चे शिष्य, तपस्वी राजनेता, ईमानदारी के गवाह श्री लाल बहादुर शास्त्री जी के कहने पर देश कि जनता ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल मे सप्ताह में एक समय उपवास करना शुरू कर दिया था. कारण था भारत का खाद्यान्न में आत्मनिर्भर न होना और अमरीका से सड़ा गला अन्न मंगाकर जनता को पेट्पूर्ति हेतु उपलब्ध करवाना जिससे भारत को आर्थिक हानि और उसके आत्म गौरव को चोट पहुँच रही थी. इसके लिए प्रिय प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने खेति कि पैदावार बढ़ाने, खेती का उपज का क्षेत्रफल बढ़ाने कि भी योजनाए बनाई.

इतना ही नहि आपने देश को मुसीबत में देखकर जय जवान, जय किसान का भी नारा दिया और भारत को सिर्फ कृषि क्षेत्र में ही नहि बल्कि रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया. देश पर पाकिस्तानी आक्रमण का जवाब दिया और लाहौर तक का क्षेत्र छिन लिया. भारत कि फ़ौज को खुलकर कार्यवाही करने कि छूट दी और पाकिस्तान को नाको चने चब्बा दिए.

कद काठी में छोटे, चेहरे से सज्जन, भोले दिखने वाले शास्त्री जी बेहद आम व्यक्ति, उच्च गुणवान व्यक्तित्व के धनी, दृढ इच्छाशक्ति और बडे ही जीवट के व्यक्तित्व थे. आप बहुत ही लोकप्रिय जनता थे. आपको तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष के कामराज का भी भरपूर समर्थन था. अपने प्रधानमंत्री के रूप मे लगभग डेढ़ साल कार्य किया और इतने कम समय मे आपके निर्णयों से ही आप बहुत लोकप्रिय हो गए. जिसमे पाकिस्तान के विरुद्ध युद्ध मे भारतीय सेना कि जीत ने आपकी लोकप्रियता मे चार चाँद लगा दिए. आप जवाहरलाल लाल नेहरू जी को प्रिय थे आपके मंत्रिमंडल मे इंदिरा गाँधी सुचना प्रसारण मंत्री थी.

जनवरी 1966 में ताशकंद में पाकिस्तन के मार्शल ला शाशक जनरल अयूब खान के साथ शांति वार्ता करने गए थे 1965 के भारत पाक युध बंदी के बाद. यह शांति वार्ता रूस तत्कालीन सोवियत संघ के निमंत्रण पर आयोजित कि गयी थी. वहां पर हृदयाघात से शास्त्री जी कि मृत्यु समझौते के बाद ही हो गयी ज़िस पर जनता हमेशा संदेह करती रही. अब तक सरकार जनता के संदेह को दुर करने में असफल रही है और कई जाँच रिपोर्ट आई, लेकिन जनता को सही संतुस्तीपरख उत्तर नहि मिला है. आपका जन्म दीन भी 2 अक्तूबर है. इस दिन ही महात्मा गाँधी का भी जन्म दिन मनया जाता है.

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