किस मछली में शल्क नहीं होते हैं? जानिए

ग्रह पर सबसे विविध प्रकार के कशेरुक जानवरों में से मछली एक हैं। सभी प्रकार के मीठे और समुद्री जल के वातावरण में रहने के कारण, मछलीके कई प्रकार विभिन्न समूहों में वर्गीकृत किये है। आम तौर पर, सभी मछली प्रजातियों को तीन मुख्य समूहों में विभाजित किया जाता है जिन्हें सुपरक्लास कहा जाता है। ये अग्नथा (जबड़े न होनेवाली मछलियाँ), कार्टिलाजिनस और (ओस्टीचिएथेस) बोनी मछली हैं।

उत्क्रांति के दौरान, जानवरों ने खुद को बचाने और विभिन्न वातावरणों में जीवित रहने के लिए कई तरीके विकसित किए हैं। मछली ने इस विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिएशल्क (स्केल्स) विकसित किये जिनका सबसे महत्वपूर्ण कार्य मछलीकी सुरक्षा करना है। मछली के शरीर परकठीण शल्क (स्केल्स) उन्हें शिकारियों, परजीवियों और यहां तक कि शारीरिक आघात से बचाने में मदद कर सकते हैं यदि वे एक कठीण सतह के करीब तैरते हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शल्क के बिना मछली को संरक्षण नहीं है। उनमें से कई अन्य विशेषताओं के साथ संपन्न हुए हैं जो उन्हें अक्सर बहुत कठोर वातावरण में जीवित रहने की अनुमति देते हैं। कुछ में मोटी त्वचा विकसित है, तो दूसरोंमेँ संवेदी अंगों को विकसित किया है जो उन्हें बेहतर शिकारियों से बचने की अनुमति देता है।बिना शल्क के कई प्रकार की मछलियां हैं जो अलग-अलग आकारिकी पेश करती हैं और व्यवहार में भिन्न होती हैं। इन प्रजातियों को अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत किया हैं

बिना शल्क वाली मछलियोंकी कुछ प्रजतियाँ के उदहारण हैं १ सी लैम्प प्रे Sea Lamprey

उनके लंबे, लगभग सांप जैसे शरीर के कारण, यह समुद्री लैंप पर नहीं होते ऐसे दिखते लेकिन उनके शरीरके पीछे छोटे पंख होते हैं जो उन्हें पानी के माध्यम से फैलाने की अनुमति देता है। उनका वैज्ञानिक नाम पेट्रोमिज़ॉन मैरिनस है और वे ऑर्डर पेट्रोमीज़ोन्टिफोर्मेस से संबंधित हैं। यह मछली १५ से अधिक वर्षों तक जीवित रह सकता है और लंबाई में १ मीटर तक की होती है।ये अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर में मिलते हैI

हैगफिश Pacific Hagfish

पसिफ़िक हैगफिश का वैज्ञानिक नाम इप्टाट्रेटस स्टाउटी है और वे बिना जबड़े होनेवाले अन्य समूह से संबंधित हैं जिन्हें माक्सीनी के नाम से जाना जाता है। इस मछली का शरीर एक लम्बी, ईल जैसा होता है जिसका कोई सच्चा पंख नहीं होता है। हगफिश की त्वचा झुलसी त्वचा होतीजिसके शल्क नहीं है, और त्वचा भीतर मांसपेशी फाइबर होते हैं। इनके त्वचा का उपयोग मनुष्यों द्वारा विभिन्न प्रकार के चमड़े और वस्त्रों में प्रयुक्त चमड़े के रूप में किया जाता है।

Rat fish रैट फिश

: इसका वैज्ञानिक नाम चीमेरा मोनस्ट्रॉसा है और यह चीमिरिफोर्मेस के क्रम से संबंधित है। उन्हें एक खरगोश मछली के रूप में भी जाना जाता है और इनका बहुत बड़ा सिर होता है और उनकी बड़ी आँखें उन्हें एक अलग रूप देती हैं जो उनके उपनाम में योगदान देता है।वे अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर के केवल बहुत गहरे पानी में रहते हैं, जिससे उनका अध्ययन करना अपेक्षाकृत कठिन हो जाता है। वे आम तौर पर शैवाल, छोटी मछली क्रस्टेशियंस या इक्यानोडर्मस का आहार लेते हैं

कांगर ईल Conger eel

वैज्ञानिक रूप से कांगर कांगर रूप में जाना जाता है, कॉंगर ईल२ मीटर की लंबाई तक पहुंच सकता है। उनका शरीरी रचना अन्य ईल के समान है। उनके पास बहुत मोटी त्वचा है जो एक बलगम और प्रोटीन का निर्माण करती है जो कीचड़ का निर्माण करती है जो ग्रंथियों के माध्यम से उत्सर्जित होती है।

भूमध्यसागरीय मोरे Mediterranean More

भूमध्य मोरे (मुरैना हेलिना) है, जो भूमध्य समुद्रमें के साथ अन्य सागर में रहती उसे भी शल्क नहीं होते ये ईल मछ्लीसे संबंधित है। उनके पास एक लंबा और चपटा शरीर है जो एक महान लंबाई तक पहुंचता है। उनका सिर कई तेज दांतों के साथ एक बड़ा मुंह रखता है और उनकी त्वचा पर अनियमित रंग होते हैं जो दाग की तरह दिखते हैं। वे समुद्रमें चट्टानी क्षेत्रों में निवास करते हैं और दरारें के बीच रहते हैं, अन्य मछलियों, सेफलोपोड्स और / या क्रस्टेशियंस इनका आहार हैं।

इसके सिवाय मीठे पानीमें रहनेवाले कैट फिश में शल्क नहीं होते ये हैं

१ channel catfish (Ictalurus punctatus)

ब्लैक बुलहेड कैटफ़िश (एमीयुरस मेलस)Black Bullhead Catfish (Amyurus mellus)

इन मछली के अलावा, दुनिया में कुछ और प्रजातियां हैं, जिसमें शल्क नहीं उनमें से अधिकांश बहुमत सिल्यूरिफॉर्म के क्रम से संबंधित हैं। इनमें कई कैटफ़िश प्रजातियां शामिल हैं।

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