कृत्रिम होशियारी (Artificial intelligence) क्या है? जानिए

अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , कंप्यूटर विज्ञान में पढ़ा जाने वाला १ विषय है जिसमे इस बात पर अध्यन किया जाता है कि ऐसी समस्याओं को कैसे सुलझाया जाए जिनमे कंप्यूटर नैसर्गिक रूप से निपुण नहीं होते।

कुछ समस्याएँ कंप्यूटर बड़े आराम से सुझा देते हैं जैसे :

१. डाटा व्यक्ति से लेना (input ) तथा इसे संभल कर रखना (डेटाबेस सॉफ्टवेयर में store करना ) और बिना भूले याद कर लेना (query करना )।

२. अंकगणित

३. जानकारी भेजना व लेना (नेटवर्किंग या इंटरनेट द्वारा )

४. कंप्यूटर भाषाएं समझना , जैसे जावा या पाइथन

पर कुछ और प्रश्न है जो कंप्यूटर के लिए उतना आसान नहीं :

जैसे :

१. फोटो व वीडियो देखकर उसमे क्या है ये समझना (इमेज रिकग्निशन )

२. मानव की भाषा समझना जैसे अंग्रेजी या हिंदी

३. शतरंज या ऐसे ही कठिन मानसिक कार्य

४. मानवीय हरकतें जैसे चलना उठना बैठना। evolution ने हमे ये प्रक्रियाएं ऐसी सीखा दी हैं की हमे सोचने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती , पर कंप्यूटर के लिए यह बेहद कठिन हैं।

इस तरह के प्रश्नो के उत्तर ढूंढने पर किये जाने वाले शोध को आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस कहते हैं। अर्टिफिशियल इंटेलिजेस की शोध में विभिन्न तरीकों को विकसित किया जाता है जिन्हे अल्गोरिथ्म्स (algorithms) कहते हैं।

हाल के वर्षों में इसमें बेहतर परिणाम मिले हैं। आपके फ़ोन में गूगल फोटोज एप्प अपने आप ही फोटोज को व्यवस्थित कर देता है या आपके कीबोर्ड में अंग्रेजी टाइप करने पर हिंदी खुद से लिख कर आ जाना या आपके ऊँगली के छाप से आधार पहचान होना ये सभी आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के उदारहण हैं।

उपयोगिता में आयो इस वृद्धि के कारण हैं :

१. पहले से ज़्यादा ताकतवर कंप्यूटर

२. डाटा की बहुतायत। डाटा दिखाकर ही अल्गोरिथ्म्स को कोई कार्य सिखाया जाता है। डाटा देखकर सीखने वाले अल्गोरिथ्म्स को मशीन लर्निंग कहते हैं।

३. मशीन लर्निंग अल्गोरिथ्म्स का एक नया प्रकार जिसे डीप लर्निंग कहते हैं।

ऐसा माना जाता है की अगर भविष्य में आर्टिफीसियल इंटेलगेने अल्गोरिथ्म्स सिर्फ एक कार्य करने के बजाय वो सभी कार्य सीख जायें जो एक मनुष्य कर सकता है , तो वो मनुष्य जैसे या मनुष्य से बेहतर हो जाएंगे जैसे रोबोट फिल्म में रजनीकांत का किरदार था। पर आज के दिन में ऐसा कर पाना पॉसिबल नहीं है। Chiti रोबोट जैसे अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बनाने में शायद कई दशक या कुछ शताब्दियाँ भी लग जाएँ।

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