कृषि कानूनों के अमल पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक क्यों लगा दी ? जानिए वजह

जब कानून लागू ही नही होगा तो आन्दोलन का मतलब ही नहीं। इसलिए कृषि कानूनों के अमल पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी।

कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. जिसमें कोर्ट ने अगले आदेश तक तीन कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगा दिया. इसके अलावा कोर्ट ने नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की शिकायतों पर गौर करने के लिए एक समिति का गठन कर दिया है.

इधर कोर्ट के आदेश के बाद अब चर्चा शुरू हो गयी है कि क्या किसान आंदोलन खत्म हो जाएगा ? आइये जानें कोर्ट ने क्या सुनाया आदेश और किसानों का इसपर क्या है कहना ?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल तीनों कृषि कानूनों को होल्ड में डाल दिया गया है. लेकिन इसके बावजूद किसानों में खुशी नजर नहीं आयी. किसान नेताओं ने कोर्ट के आदेश के बाद भी आंदोलन आगे जारी रखने की चेतावनी दे डाली. किसान नेताओं ने कहा, जब तक सरकार कृषि कानूनों के पूरी तरह से रद्द नहीं कर देती है, तब तक वे दिल्ली बॉर्डरों से नहीं हटेंगे.

सिंघु बॉर्डर पर एक प्रदर्शनकारी किसान ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कहा, कानूनों पर रोक का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि यह सरकार का एक तरीका है कि हमारा आंदोलन बंद हो जाए. यह सुप्रीम कोर्ट का काम नहीं है यह सरकार का काम था, संसद का काम था और संसद इसे वापस ले. जब तक संसद में ये वापस नहीं होंगे हमारा संघर्ष जारी रहेगा.

वहीं भारतीय किसान यूनियन के बिंदर सिंह गोलेवाला ने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट से विनती करना चाहेंगे कि कानूनों पर रोक नहीं बल्कि कोर्ट को कानूनों को रद्द करने का फैसला करना चाहिए क्योंकि डेढ़ महीना हो गया है सरकार इस पर कुछ सोच नहीं रही है.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम जनता के जीवन और सम्पत्ति की रक्षा को लेकर चिंतित हैं. कोर्ट ने सख्त तेवर में कहा, कोई ताकत हमें नये कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करने से नहीं रोक सकती. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने किसान संगठनों से सहयोग मांगते हुए कहा कि कृषि कानूनों पर जो लोग सही में समाधान चाहते हैं, वे समिति के पास जाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति में कौन-कौन

सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों को लेकर चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है. जिसमें भारतीय किसान यूनियन के नेता भूपेंद्र सिंह मान और शेतकारी संगठन के अनिल घानवत शामिल होंगे. इसके अलावा प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी समिति के अन्य दो सदस्य होंगे.

गौरतलब है कि करीब डेढ़ महीने से हजारों किसान दिल्ली के विभिन्न बॉर्डरों पर जमे हुए हैं. किसानों ने कृषि कानूनों को पूरी तरह से रद्द करने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं. उनका कहना है कि जब तक कानून वापस नहीं लिये जाएंगे, तब तक वो बॉर्डरों से हटने वाले नहीं हैं. सरकार और किसान नेताओं के बीच अब तक 9वें दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई भी नतीजे अब तक नहीं निकले हैं.

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