केदारनाथ में मंदिर के पास एक दिन रहने के लिए एक कमरे का किराया कितना है? जानिए

केदारनाथ धाम के केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड से रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है, उत्तराखंड के हिमालय पर्वत के गोद में केदारनाथ मंदिर12 ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के कारण चारधाम और पंच केदार में से एक है, यहां पर मंदिर 12 महीने में सिर्फ 6 महीने ही खुला रहता है, मई माह से नवंबर माह तक ही केदारनाथ मंदिर खुलता है।

प्रत्येक वर्ष अक्षय तृतीया के शुभ दिन पर केदारनाथ धाम के पट खुलते है, महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर उखीमठ के पुजारीकेदारनाथ मंदिर के पट खुलने की तारीख की घोषणा करते है, और नवंबर माह में भाई दूज तक यह मंदिर खुला रहता है, भाई दूज के बाद दर्शनार्थियों के लिए केदारनाथ बाबा के दर्शन 6 महीने के लिए बंद हो जाते हैं।

केदारनाथ मंदिर की यात्रा गौरीकुंड से शुरू होती है, यात्री को मंदिर तक पहुंचने के लिए 16 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है, 300 किलोमीटर ऊपर पहाड़ी पर पहाड़ियों पर बना हुआ शिव जी का मंदिर है ,यहां पर जाने के लिए सुबह गौरीकुंड से 4:00 बजे यात्रा चालू होती है दोपहर 1:30 बजे तक वहां पर यात्री जा सकते है, उसके बाद वहां पर जाना बंद हो जाता है।

यहां पर रहने के लिए कमरे का किराया कम से 800 से 1000 रुपए के बीच में होता है, हम यहां पर 2016 में गए थे 20 जून 2016 को हम केदारनाथ धाम पर गए थे तब हमने वहां पर कमरे का किराया ₹800 दिया था जो कि बाबा के मंदिर के बिल्कुल ही पास था 200 मीटर से भी पहले हमारा कमरा था ।

अकस्मात बाबा ने हमारी डोरी खींची और हम वहां पर पहुंच गए वहां पर पहुंचने के लिए हमने हम हमारी गाड़ी से ही गए थे हम सबसे पहले हरिद्वार में गंगा स्नान किया वहां पर हम एक रात रूके थे उसके बाद हम ऊपर चढ़ने लगे तो हमें वहां पर कई जगह बहुत ही खूबसूरत और अच्छी लगी वहां पर रोड के एक साइड तो पहाड़ है और दूसरी साइड नीचे गंगा नदी बह रही है ।

बीच में रोड पर चलते हुए हमारा दिल बहुत ही कांप रहा था लेकिन मजा आ रहा था यात्रा करने में क्योंकि मन में विश्वास था बाबा के दर्शन करने का और चलते गए चलते गए बीच में बहुत अच्छी-अच्छी जगह हमें वहां पर मिली रुद्रप्रयाग, गुप्तकाशी ओकिमथ, जैसी बहुत ही सुंदर- सुंदर जगह वहां पर है, वहां पर एक पहाड़ से बहुत गर्म पानी आता है और वह गंगा नदी में मिल जाता है ।

वहां पर मां पार्वती जी का मंदिर है जहां पर शिव जी ने और पार्वती जी ने फेरे लिए थे वह मंदिर बहुत ही सुंदर और साक्षात मंदिर है, वहां पर आज भी अग्नि प्रज्वलित है वह अग्नि हमेशा 12 महीने जलती रहती है ,बरसों से ही वहां पर जो लोग जाकर दर्शन करते है, उनके मनोकामना पूर्ण होती है, और बहुत ऊपर जाने के बाद हमें केदारनाथ धाम बाबा भोलेनाथ का मंदिर आता है उखीमठ सुपर जाते-जाते हमें एक दिन पूरा लग जाता है।

यहां पर हर यात्री को अपनी फिटनेस की पूरी जांच करवा कर ही जाना चाहिए अस्थमा के पेशेंट को वहां पर चढ़ाई चढ़ने में समस्या हो सकती है, बूढ़े बुजुर्गों और बच्चों के लिए वहां पर घोड़े खच्चर, पालकिया चलती है, उस में बैठकर जा सकते हैं।

ट्रैक मार्ग पर पीने के पानी और दुकानों की उचित व्यवस्था है, नॉर्मल रेट में वहां पर खाने-पीने की सभी सुविधा उपलब्ध है, और वहां पर हेलीपैड भी बने हुए है, और अन्य हेलीपैड से केदारनाथ जाने के लिए कई हेलीपैड बने हुए है जहां पर आप जा सकते है।

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