कैसे मित्र सुदामा को श्रीकृष्ण ने धनवान बना दिया? जानिए

धनियाखेड़ी गांव में चल रही भागवत कथा के दाैरान कथा व्यास पं ओमप्रकाश शुक्ला ने सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाया। इस दौरान कथा व्यास ने कहा कि सुदामा अपनी प|ी के कहने पर तीन मुठ्ठी चावल लेकर अपने मित्र द्वारकाधीश से मिलने पहुंचे। कृष्ण ने दो मुठ्ठी चावल खा लिए। जिसके बदले में श्रीकृष्ण ने सुदामा को दरिद्रता दूर कर धनवान बना दिया। श्री कृष्ण ने अपने आंसुओं से सुदामा के चरण धोए और अच्छे कपड़े पहनाएं और विदा किया। कथा स्थल पर कृष्ण सुदामा के मिलन की सजीव झांकी सजाई गई।

श्रद्धालुओं ने झांकी पर गुलाब की पंखुरियां बरसा कर स्वागत किया। इसके बाद रुक्मणी विवाह की कथा सुनाई। पं शुक्ला ने कहा कि श्रीकृष्ण के साथ हमेशा देवी राधा का नाम आता है भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं में यह भी दिखाया था कि राधा और श्रीकृष्ण दो नहीं बल्कि एक हैं। लेकिन देवी राधा के साथ श्रीकृष्ण का लौकिक विवाह नहीं हो पाया। देवी राधा के बाद भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय देवी रुक्मणी हुईं।

रुक्मिणी ने प्रेम पत्र लिखकर ब्राह्मण कन्या सुनंदा के हाथ श्रीकृष्ण के पास भेजा। प्रेम पत्र पाकर श्रीकृष्‍ण ने उनसे विवाह करने की इच्छा की। जब उन्हें रुक्मिणी का प्रेम पत्र मिला तो प्रेम पत्र पढ़कर श्रीकृष्‍ण को समझ आया कि रुक्मिणी संकट में हैं। भगवान ने अपने भाई बलराम के साथ मिलकर एक योजना बनाई। जब शिशुपाल बारात लेकर रुक्मिणी के द्वार आए तो श्रीकृष्‍ण ने रुक्मिणी का अपहरण कर लिया। इसके बाद रुक्मणि विवाह हुआ। कथा सुनने बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

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