क्या आप माता लक्ष्मी और भगवन विष्णु की सुंदर कहानी जानते हैं?

एक गाँव में एक अनपढ़ व्यक्ति था । वह एक महात्मा के पास गया और उनसे विनती करने लगा, “हे महात्मा, मैं तो पढ़ा लिखा हूँ नहीं अतः मुझे तो कोई सीधा सरल मार्ग बताइए जिस से मैं हरि की उपासना कर सकूँ।” महात्मा ने उसे कहा,”जब भी तुम्हें समय मिले “अघमोचन” का जाप कर लिया करो । “अघमोचन” श्री विष्णु का नाम है जिसका अर्थ है पापों को हरने वाले ।”

महात्मा को धन्यवाद दे कर वह व्यक्ति अपने घर चल दिया किंतु बीच रास्ते में ही वह नाम भूल गया जो महात्मा ने बताया था । बहुत प्रयत्न करने के बाद उसे याद आया कि वह शब्द शायद “घमोचन” था । बस फिर वह सुबह शाम “घमोचन घमोचन” जपने लगा ।

वैकुण्ठ लोक में श्री नारायण उस व्यक्ति का जप सुनकर मंद मंद मुस्कुरा रहे थे। श्री विष्णु को प्रसन्न देख माता लक्ष्मी ने उनकी प्रसन्नता का कारण पूछा । श्री हरि ने कहा “उस व्यक्ति को देखिए देवी । जिस श्रद्धा से वह निरंतर हमारा नाम जप रहा है, उसकी भक्ति हमें अपार आनंद दे रही है।” माता लक्ष्मी ने जब उस व्यक्ति का जप सुना तो असमंजस में पड़ गईं । प्रभु से बोलीं, “स्वामी ! यह व्यक्ति किसका नाम जप रहा है? यह तो घमोचन घमोचन जप रहा है ।”

विष्णु भगवान हँस कर बोले,” देवी ,यह मेरा नाम जप रहा ।” माता लक्ष्मी ने कहा कि आपका यह नाम तो किसी शास्त्र में नहीं है । तब विष्णु भगवान ने कहा, “देवी, यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं अपितु एक विलक्षण व्यक्ति है। विश्वास न हो तो वेश बदलकर पृथ्वी पर चलें ।”

तब दोनों एक साधारण व्यक्ति का रूप धारण कर पृथ्वी लोक पर आए । आदतनुसार वह व्यक्ति खेत में हल चलाते हुए घमोचन घमोचन जप रहा था । विष्णु भगवान ने माता लक्ष्मी से कहा, ” मैं यहीं एक पेड़ के पिछे छिप जाता हूँ आप उस व्यक्ति से अपने प्रश्न का उत्तर माँग कर आइए।” । तब देवी एक साधारण स्त्री के रूप में उस व्यक्ति के सामने गईं और भगवान विष्णु पेड़ के पीछे छिपकर मुस्कुराते हुए दोनों की बातें सुनने लगे ।

माँ लक्ष्मी उस व्यक्ति से पूछने लगीं, ” यह तुम किसका नाम जपते हो ? मैंने तो यह शब्द ही पहली बार सुना है ।” उस व्यक्ति ने देवी की बात को अनसुना कर दिया और घमोचन घमोचन जपता रहा । देवी ने फिर वही प्रश्न पूछा पर उसने कोई उत्तर नहीं दिया । उसे क्रोध आ रहा था कि पता नहीं यह स्त्री कौन है और उसके जप में विघ्न क्यों डाल रही ।

देवी के बार बार प्रश्न पूछनेपर अंततः उसका सब्र टूट गया और उसने झल्ला कर बोला, ” तेरे खसम (पति) का नाम जप रहा हूँ ।”

यह सुनते ही माँ लक्ष्मी को बड़ा आश्चर्य हुआ और वह उन्हें लगा कि यह मुझे पहचान कैसै गया । उन्होंने फिर पूछा ,” अच्छा यह मेरे पति का नाम है ? तू मेरे पति को जानता है ? “

व्यक्ति तो सब बातों से अनजान हल चलाते हुए क्रोध में उत्तर देता रहा, ” हाँ जानता हूँ । उस पेड़ के पीछे तेरी प्रतीक्षा कर रहा है। जा उसके पास, मुझे मेरा काम करने दे।”

अब तो माता लक्ष्मी को और अधिक आश्चर्य हुआऔर वह शीघ्र भगवान के पास जा कर बोलीं ,”प्रभु यह तो हम दोनो को पहचान गया ।”

भगवान विष्णु हँस कर बोलने लगे, ” कहा था न देवी बहुत विलक्षण भक्त है । “

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