क्या गोलियां संक्रमण का कारण बनती हैं और उन्हें तुरंत हटाने की आवश्यकता होती है जैसे वे फिल्मों में दिखाते हैं?

कभी-कभी सर्जन शरीर में फंसी बुलेट्स को निकालने की बजाय वहीं रहने देने को प्राथमिकता देते हैं।

फिल्मों में अक्सर यह दिखाते हैं कि किसी व्यक्ति को गोली लगने पर वह मरनेवाला होता है। उसका खून बहुत बह रहा होता है और ऐसे में हीरो या कोई अन्य कलाकार चाकू से शरीर में अटकी बुलेट को निकालकर उसकी जान बचा लेता है।

वास्तविकता में बुलेट एक अक्रिय बाहरी पदार्थ होती है। शरीर में घुसते ही यह हानि पहुंचा देती है और इसका इतना ही काम होता है। अपने आप में यह एक हानिरहित वस्तु होती है। यह उन पदार्थों से बनी होती है जो शरीर के टिशू वगैरह साथ आमतौर पर प्रतिक्रिया नहीं करते। यदि यह अन्य किसी प्रकार से शरीर को हानि पहुंचाती तो भी शरीर उस खतरे का सामना कर लेता।

गोली चलने की प्रक्रिया में निकली गर्मी से बुलेट स्टरलाइज़्ड हो जाती है। ऐसे में यदि किसी को गोली के घाव पर कोई इन्फेक्शन होता है तो किसी अन्य बाहरी या भीतरी कारण से होता है।

इस प्रकार शरीर में फंसी बुलेट व्यक्ति को घायल करने के अलावा कोई हानि नहीं पहुंचाती। कभी-कभी यह ऐसे स्थान पर जाकर रुक जाती है जहां से खून का बहाव तेज हो सकता था लेकिन यह उस बहाव को भी रोक देती है।

जब बुलेट से घायल कोई व्यक्ति अस्पताल में आता है तो डॉक्टर सबसे पहले यह देखते हैं कि बुलेट कहां है और इसने कितना नुकसान किया है।

डॉक्टर बुलेट के घाव को साफ करके शरीर को पहुंची चोट को रिपेयर करते हैं लेकिन बुलेट को फौरन ही नहीं निकाल लेते। बुलेट को केवल घाव को रिपेयर करने के दौरान ही निकाला जाता है।

इस प्रकार यदि घाव को और अधिक रिपेयर करने की ज़रूरत नहीं होती या ऐसा लगता है कि बुलेट को निकालने पर और अधिक नुकसान पहुंच सकता है तो बुलेट को शरीर में ही छोड़ दिया जाता है।

जब मैं मेडिकल स्टूडेंट था तब पंजाब में मुझे दो बुजुर्ग मिले जिनके शरीर में बुलेट के छर्रे फंसे थे। उनमें से एक को तो इसकी जानकारी ही नहीं थी। वह कूल्हे का जोड़ बदलवाने के लिए आया था और हमने उसकी हड्डी में फंसे छर्रे को 6 साल बाद केवल इसलिए निकाला क्योंकि हम उस क्षेत्र में नया जोड़ लगा रहे थे।

ऐसा केवल फिल्मों में ही होता है कि किसी व्यक्ति के शरीर में बुलेट ऐसी जगह फंसी होती है कि उसे निकालने के कारण व्यक्ति की जान जा सकती है। वास्तविकता में ऐसा नहीं होता।

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