क्या साईं बाबा मुसलमान थे, यदि हाँ तो फिर हिंदू उनकी पूजा किस आधार पर करते हैं?

बहुत ही ज़बरदस्त मार्केटिंग की गई थी इनके नाम पर । इसमे मुख्य भूमिका प्रचारकों, लेखको और फिल्म निर्माताओं की हैं ।

कुछ लेखको ने इनके चमत्कार के किस्से लिख डाले । फिर कुछ लोगों ने जमकर इनका प्रचार किया और बाकि का काम फिल्म निर्माताओं ने इनपर फिल्म बनाकर पूरा कर दिया — सुधीर दल्वी अभिनित फिल्म “शिरडी वाले साई बाबा ” ।

जो दिखता हैं वही बिकता हैं इसलिए आज एक मुस्लिम फकीर भगवान बने मंदिर मे बैठा हैं । हिंदु धर्म मे मुर्दो कि पूजा नहीं होती । कुछ लोग कहेंगे भाई तब राम और कृष्ण का क्या ? तो भाई वे दोनों अपवाद हैं क्योंकि वे विष्णु के अवतार थे ।

कुछ लोग और कहेंगे कि तब लोगों की मनोकामना पूरी कैसेे हो रही हैं ? तो ऐसा हैं कि लोग साई के नाम पर वास्तव मे उस ईश्वरीय चेतना से प्रार्थना कर लेते हैं और संयोगवश उनकी मनोकामना पूरी हो जाती हैं और लोग कहते हैं साई की कृपा हैं ।

मुझे येे बात समझ नहीं आती कि हमारे धर्म मे इतने देवी देवता हैं फिर भी कुछ हिंदु मज़ारो पर जाके सर झुकाते हैं । क्यों भाई हमारे देवी देवताओं का अकाल पड़ गया हैं या फिर उनकी शक्ति पर विश्वाश नहीं रहा । जबकि हमारे पास परब्रह्म केे दो महान स्वरुप हैं — शिव और कृष्ण ।

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