क्यों कभी-कभी चाँद लाल दिखाई देता है? जानिए

धरती के वातावरण में भी बड़ा रोल इसके वातावरण में उपस्थित प्रदूषण का होता है. बाकि अलग-अलग मौसम के दौरान धरती की अपेक्षा चांद की स्थिति आदि का इसपर बहुत प्रभाव पड़ता है. इससे हमें धरती पर चांद अलग-अलग रंगों का दिखता है.

वैसे चांद जब धरती के क्षितिज पर होता है (उगते और डूबते हुए) तो धरती का मोटा वातावरण खुद को पार करके आने वाला प्रकाश की नीली-हरी और बैंगनी प्रकाश किरणों को सोख लेता है. बहुत ही वैज्ञानिक ढंग से कहें तो बैंगनी, हरे आदि रंग की तरंगदैर्ध्य कम होने के चलते वे धरती के वातावरण को पार नहीं कर पाते, वहीं लाल रंग की तरंगें, ज्यादा तरंगदैर्ध्य के कारण धरती के इस वातावरण को पार कर जाती हैं और हम तक लाल-पीले रंग की रौशनी पहुंचती है इसलिए धरती से चांद पीला और लाल दिखाई देता है.

लेकिन चांद बड़ा और लाल कब दिखता है?

धरती सूर्य के चक्कर लगाती है और चांद धरती के चक्कर लगाता है. ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि धरती और चांद के बीच में पृथ्वी आ जाती है. ऐसी हालत में पृथ्वी की परछाई चांद पर पड़ने लगती है, और चांद के जितने हिस्से पर पृथ्वी की परछाई पड़ रही होती है, उतने हिस्से का चांद हमें नहीं दिखता है.

लेकिन जब चांद धरती की परछाई के ठीक बीच में होता है तो धरती के चारों तरफ से परावर्तित होने (छिटकने) वाली रौशनी भी उसी वक्त चांद पर पड़ती है. ऐसे में एक ओर जहां चांद पर टेढ़ी रौशनी जा रही होती है, तो वहीं दूसरी ओर चांद पर धरती की परछाई भी पड़ रही होती है. ऐसे में चांद से निकलने वाली हल्की रौशनी में शामिल नीले, हरे और बैंगनी रंग की प्रकाश किरणें धरती के वातावरण को पार करके धरती तक पहुंच ही नहीं पाती हैं और हमें दिखाई देता है एक बड़ा सा लाल चांद.

लाल इसलिए क्योंकि रौशनी और परछाई का खेल चल रहा होता है. बड़ा इसलिए क्योंकि चांद उस वक्त धरती के सबसे पास होता है.

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