गंगूबाई काठियावाड़ी कौन थी? जानिए इनके बारे में

गंगूबाई गुजरात के काठियावाड़ की रहने वाली थी जो एक दिन नायिका बनने के लिए अपने प्रेमी के साथ मुंबई भाग गई, जहां उसके प्रेमी ने उस समय उसे 500 रुपये में कोठे पर बेच दिया।

बाद में गंगूबाई मुंबई के कमाठीपुरा में एक वेश्यालय चलाती थी और बड़े अपराधी गैंगस्टरों के साथ उसके संबंध थे, उसने 80 के दशक के खूंखार माफिया करीम लाला को अपना भाई बना लिया, जिस पर उसने बहुत प्रगति की।

गंगूबाई नशीले पदार्थों की तस्करी, मासूमों की हत्या, वेश्यावृत्ति के लिए छोटी बच्चियों की खरीद-फरोख्त और दलाली का धंधा पूरे प्रभुत्व से करती थी।

सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद रेड लाइट एरिया को मुंबई से बाहर नहीं जाने दिया गया. कमाठीपुरा में आज भी गंगूबाई की मूर्ति है।

हाल ही में, इसके जीवन पर आधारित एक फिल्म रिलीज़ हुई है जिसमें आलिया भट्ट गंगूबाई की भूमिका निभाती हैं, जिन्हें गरीबों के एक निडर, ईमानदार, मसीहा, व्यवस्था से लड़ने और अधिकारों का दावा करने वाली आदर्श महिला के रूप में दिखाया गया है।

लेखक एस हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई’ के मुताबिक गंगूबाई कठियावाड़ी गुजरात की रहने वाली थीं और उनका असली नाम गंगा हरजीवनदास काठियावाड़ी था। हर एक की देखभाल पूरी तरह से स्वस्थ है। यह एक सफल अभिनेता है। वे स्थायी थे और उनके पति स्थायी थे। उस रिक्त ज्याब उहज 16 साल थे। प्यार में गंगूबाई नें स्वीकारां मैं इंसान हूं और मैं हूँ। लेकोन्या ने उनके सेथ जोले वाला था उसके बारे में गंगुआई ने तब तकसेना में भी नहीं सोचा था। गंगूबाई ने धोखा दिया। गंगूबाई के अनुपात में गलत होने की स्थिति में इसे गलत तरीके से पेश किया गया था।

माफ़ीया करीम लाला को…

गंगुआई को ओटी उमर में ही वेश्यावती के लिए मकबूर किया गाया। बाद में खाने के लिए संपर्क में आने और ग्राहक बनने के लिए। गंगूबाई मुंबई के कमाईपुरा में कोठा चलाती कीट। ‘माफिया वाच्स ऑफ एम’ की किताब में माफिया करीम लाला का भी किया गया है। किताब के हिसाब से लाला की एक सदस्य ने गंगूबाई के साथ दुष्कर्म किया। खुद के साथ दुष्कर्म करने वालों के लिए गंगूबाई करीमी लाला के पास और इंसाफ की गहर। और वे करीम लाला को लपेटकर अपने भाई बनाते हैं। बदली करीम लाला ने अपनी बैटरी को बढ़ाया है। । इसके साथ ही वे काम करते हैं। विपरीत गति के वाहन के विपरीत गति के विपरीत गति का संचार उसके विपरीत होता है। आज भी गांगूबाई की प्रतिमा के संचालन में।

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