गायत्री मंत्र और हनुमान चालीसा में क्या अंतर है इनमें से कौन सा बड़ा है हनुमान चालीसा या गायत्री मंत्र?

आपने तो मेरे मन की बात लिख दी या पूँछ ली क्यूंकि पिछले एक साल से मैं गायत्री मंत्र जप कर रहा हूँ और दिवाली के कुछ दिनों बाद मुझे सपने में हनुमान जी के दिव्य-दर्शन हुए वो भी कुछ अलग ही रूप से तो मैं आश्चर्यचकित रह गया की आखिर मेरा मंत्र तो गायत्री मंत्र है फिर हनुमान जी क्यों आये सपने में और फिर लगातार कई दिनों तक मेरे सपनों में कृष्ण भगवान्, राधा जी, शिव भगवान्, गायत्री माता, और कई सारे देवी देवता आये | मुझे उस समय तो यह कारण समझ में नहीं आया लेकिन फिर एक रोज किसी ने मुझे फेसबुक पर बताया की भाई मंत्र कोई भी हो सकता है लेकिन आपके ईष्ट गुरु, ईष्ट भगवान् पहले प्रसन्न होंगे |

जहाँ तक गायत्री मंत्र की बात है तो यह सर्वाधिक शक्तिशाली और अति सामर्थ्यवान मंत्र बताया गया है लेकिन इससे दूसरे मन्त्रों की महत्ता कम नहीं होती क्यूंकि मंत्र कोई भी जप लो लेकिन उसका अधिपति अंततः वह सगुन और निराकार परमेश्वर ही है | गायत्री मंत्र में सभी देवों और भगवानों से प्रार्थना की गयी है और भगवान् सूर्य को प्रकाश के देवता के रूप में पूजा गया है तो शायद इसीलिए सभी भगवान् स्वप्न में आये | आपने पूंछा हनुमान चालीसा के बारे में तो यह मंत्र के रूप में नहीं जपा जाता अपितु हनुमान जी की आराधना की जाती है चालीस छंदों के पाठ के रूप में और आप जानते ही होंगे की महाकवि तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की रचना की थी |

आध्यात्मिक भक्त लोग कोई हनुमान बीज मंत्र का जप करते हैं, तो कई चालीसा का पाठ करते हैं तो कई संकट मोचक का पाठ, जैसे जिसको उनके गुरु या ज्योतिषी या पुरोहितों ने बताया और या फिर अपनी अपनी श्रद्धा | सौ बात के एक बात यह की सभी भगवान् एक ही परमेश्वर के रूप हैं कहीं कोई छोटा बड़ा नहीं | मैंने गायत्री मंत्र जप किया और मुझे हनुमान जी ने दर्शन दिए तो यही बात सार्थक सिद्ध करती है की मंत्र, देवता, ईष्ट, भगवान् सब एक हैं बस हम उन्हें अपने श्र्द्धा के हिसाब से पूजते हैं |

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