गूगल के पिक्सेल फ़ोन भारत में क्यों विफ़ल रहे?

पांच साल की उम्र में ही जैक्सन शोहरत पाने लगे थे उनकी शोहरत दिन प्रतिदिन सीधी लकीर की तरह आसमान में पहुंच रही थी। लेकिन पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का कहना था कि उनका वजन मरते समय मात्र 50 किलो था, पेट में एक भी अन्न का दाना नहीं था, सर पर मुट्ठी भर बाद बचे थे, जांघों पर सूई के अनगिनत निशान थे। माइकल जैक्सन सिर्फ हडि्डयों के ढांचा बन कर रह गए थे।

माइकल जैक्सन अपने बचपन, मां बाप, रंग, शरीर सभी से नाखुश थे। वे हमेशा इसी उधेड़बुन में रहते कि कैसे अपने भूतकाल से पीछा छुड़ाएं, कैसे प्रकृति की दी हुई हर चीज से छुटकारा मिले।

14 साल की उम्र में माइकल जैक्सन स्टार बन चुके थे और 25 साल की उम्र तक किंग आफ पाप बन गये थे। इनकी एक झलक पाने के लिए लोग तरसते रहते थे, उनके पास बेशुमार दौलत थी और वो चैरिटी भी खूब करते थे लेकिन वे हमेशा अपने शरीर से चिढ़ते रहते थे।

अपने नाक , जबड़े और भौंह की सर्जरी करवाकर उनको संतुष्टि नहीं मिली तब वे काले रंग से एकदम सफ़ेद रंग के दिखने लगे। इसके लिए उन्होंने बहुत बार सर्जरी और दवाइयों का सेवन किया।

शायद एक ऐसा चेहरा एक ऐसा शरीर जो मनुष्य का होकर भी इस दुनिया का ना लगे. जैसे वो किसी दूसरी दुनिया से आए एक जीव की तस्वीर बनना चाहते थे जिसके सौंदर्य की परिभाषा वो ख़ुद हों. सबसे अलग. सबसे अनूठा. कुछ कुछ ईश्वर की अवधारणा जैसा. एक ऐसी अवधारणा जो अमरीका में बहुत से लोगों के लिए मज़ाक़ भी थी. कई लोग माइकल जैक्सन को देख कर कहते थे, एक काले मर्द का गोरी औरत में तब्दील होना सिर्फ़ अमरीका में ही मुमकिन है. (बीबीसी हिंदी)

जो इंसान अपने आप से हमेशा नाखुश रहा है वह अपने ईसाई धर्म से भी जरुर नाराज होगा , शायद इसी वजह से 2008 में उन्होंने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था , ऐसा न्यूज वाले कहते हैं।

25 जून 2009 को जब इस महान संगीतकार की मौत होती है तब गूगल, ट्विटर, फेसबुक, विकीपीडिया सभी क्रैश हो जाते हैं।

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