जम्मू और कश्मीर का अंतिम राजा कौन है? जानिए

जम्मू कश्मीर कै अंतिम राजा नहि महाराजा थे और उनका नाम था महाराजा हरि सिंह जी. हरि सिंह जी न 26 अक्तूबर 1947 को भारत मे अपनी रयासत का विलय करा दिया और भारत कै अंतिम वाईसराय लार्ड मौन्टबटेन की इच्छा का आदर किया. भारत विलय कै उपरांत ही भारत की फोजों ने कश्मीर राज्य कै पाकिस्तानी फौज समर्थित कबाइलियों द्वारा अधिकृत भूभाग को उनसे छुड़ाया.

जो भाग भारत कै पास है उसे जम्मू कश्मीर राज्य और जो क्षेत्र पाकिस्तान कै कबाइलियों ने महाराज हरि सिंह पर आक्रमण करके उनसे छीन लिया था उसे पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर कहते है. कुछ हिस्सा चीन ने 1962 में भारत को हराकर छीन लिया था उसे अक्षय चीन कहते है. यह लद्दाख से मिला हुआ क्षेत्र है. कुछ हिस्सा जिसमे काराकोरम हिल्स कहते है पाकिस्तान ने चीन को उपहार मे उसे खुश रखने कै लिए दे दिया है.

वर्तमान जम्मू कश्मीर राज्य सिखों की रियासत मे जम्मू कै राजा गुलाब सिंह ने अपने बल से योग्यता और चतुराई से यिध कौशल से शामिल कराया और इनको महाराजा रंजीत सिंह जी ने समुचित पद ओहडा मान सम्मान देकर पुरुस्कृत भी किया. महाराजा रंजीत सिंह की मृत्यु कै बाद अमृतसर की सन्धि सिख और अंग्रेजों मे करवाकर सिखों को हार कै उपरांत युध की क्षति पूर्ति सिखां द्वारा जमा न करने पर राजा गुलाब सिंह ने सत्तर लाख रूपये अंग्रेजों को देकर जम्मू कश्मीर राज्य खरीद लिया. इस तरह महाराजा गुलाब सिंघ पहले महाराज बने. अंग्रेजों नें इन को सबसे बड़ा पद दिया सभी राज्यों मे सबसे प्रमुख राजा माने गए इनको 21 तोप की सलामी डी जाती थी. जम्मू कश्मीर राज्य कै निर्माण कै बाद 1947 तक इस क्षेत्र कै चार महाराजा बने है जिनमे प्रथम थे महाराजा गुलाब सिंह, अंतिम थे हरि सिंह और विच मे थे महाराजा प्रताप सिंह और महाराजा रणवीर सिंंघ. सबसे अधिक भूमि इनके राज्य मे थी ब्रिटिश भारत कै प्रिंसली स्टेट्स मे.

सिखों कै अधिकार से पहले कश्मीर पर अफ़ग़ानों का अधिकार था और जम्मू पर गुलाब सिंह कै दादा और पूर्वजों का. अफ़ग़ानों से पहले कश्मीर और जम्मू मुग़लों कै अधिकार मे थे. दोनो हिस्से अलग अलग थे जम्मू पर अलग राजा राज करते थे और कश्मीर पर अलग. बारहवीं येरहवी शादी मे यहां कश्मीर मे हिंदू राजा थे फिर लद्दाख कै बौद्ध राजाओं ने अधिकार कर लिया. बौद्ध राजाओं से इस्लाम कै शाहमिरि सूफ़ी लोगों ने षणयंत्र करके रियासत पर अधिकार कर लिया. फिर यह सिख साम्राज्य कै उदय तक मुसलमान बाद शाहों कै राज्य का ही हिस्सा रहा.

5 अगस्त 2019 मे भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त कर उसका भारत मे पूर्ण विलय कर दिया और इसके दो भाग कर दिए. एक भाग लद्दाख ज़िसे केंद्र सरकार शाषित है और यहां विधान सभा नहि होंगी. दूसरा हिस्सा जम्मू और कश्मीर जिसमे विधान सभा होंगी परन्तु केंद्र शाषित प्रदेश ही रहेगा. लयेहं से राज्य को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 और 35अ समाप्त कर डी गयी है. अब दोनो प्रदेश केंद्र शाषित प्रदेश है. पुरे भारत मे जम्मू कश मीर राज्य कै पूर्ण विलयिकरण का भव्य स्वागत हुआ है.

कुछ असंतुष्ट कश्मीरी मुसलमाँण नेता जो आतंकवादी और अवैध गतिविधियों मे लिप्त थे उन्होंने विरोधनकोय. गुपकार बैठक कै कुछ कश्मीरी राजनेता भी असंतुस्ट है क्योंकि उनको लगता है की उनका राजनेटिक भविष्य खतरे मे है और पहले जैसी स्थिति बहाल करने की कोशिश मे लगे है. इनमे मेहबूबा और फारुख जैसे राजबेटा है जिनका काम मात्र जनता को बरगलाना है और घाटी मे इनकी राजनैतिक स्थिति अब खराब है जन समर्थन इनके साथ नहि है.

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