जानिए अलसी के वे फायदे तथा नुकसान जो आपको अभी तक नहीं पता थे

अलसी समशीतोष्ण प्रदेश में उगने वाला एक रेशेदार पौधा है। वहीं, इसके बीजों को तेल निकालने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका तेल काफी गाढ़ा होता है। इसे हिंदी में अलसी या तीसी के नाम से पुकारा जाता है। वहीं, अंग्रेजी में फ्लैक्स सीड्स के नाम से जाना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व उपस्थित होते है। यह एंटीफंगल (फंगल इन्फेक्शन को खत्म करने वाला),एंटीऑक्सीडेंट (मुक्त कणों के प्रभाव को कम करने वाला), एंटीहाइपरटेन्सिव (बढ़े हुए बल्ड प्रेशर को कम करने वाला), कोलेस्ट्रॉल लोवेरिंग इफेक्ट (कोलेस्ट्रोल को कम करने वाला), एंटीडायबिटिक (ब्लड शुगर को कम करने वाला), एंटीथ्रोम्बिक (खून के थक्के जमने की प्रक्रिया को धीमा करने वाला) तथा एंटीट्यूमर (बढ़ते हुए ट्यूमर की रोकथाम करने वाला) का कार्य करती है।, जिस कारण इसे आयुर्वेद में एक औषधि माना गया है। अलसी में मौजूद पोषक तत्वों से जुड़ी जानकारी हम आपको आगे लेख में विस्तार से देंगे।

अलसी के बीज में पाए जाने वाले पोषक तत्व पोषक तत्वों की मात्रा

1. कैलोरी – 534 ग्राम

2. टोटल फैट :-42 ग्राम

सैचुरेटेड फैट- 3.7 ग्राम

पॉलीअनसैचुरेटेड फैट- 29 ग्राम

मोनोअनसैचुरेटेड फैट- 8 ग्राम

3. कोलेस्ट्रॉल 0 मिलीग्राम  

4. सोडियम 30 मिलीग्राम

5. पोटैशियम 813 मिलीग्राम

6. टोटल कार्बोहाइड्रेट :- 29 ग्राम

7.आहार फाइबर- 27 ग्राम

8.चीनी- 1.6 ग्राम

9. प्रोटीन 18 ग्राम

10. कैल्सियम 0.25

11. विटामिन सी 1 %

12. आयरन 31 %

13. विटामिन बी – 6 25 %

14. विटामिन बी – 1 80 ग्राम

15. मैग्नीशियम 98 %

16. फॉस्फोरस 50 %

17. फोलेट 25 %

अलसी के मुख्य दो प्रकार हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इन दोनों प्रकार में ओमेगा-3 फैटी एसिड के साथ ही पोषक तत्वों की मौजूदगी करीब-करीब समान ही होती है।

• भूरी अलसी

• पीली या सुनहरी अलसी  

औषधीय गुण –

अलसी में मौजूद औषधीय गुणों के कारण ही इसे आयुर्वेद में एक उत्तम औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। आइये, इसमें मौजूद कुछ अहम औषधीय गुणों पर एक नजर डाल लें, जो कुछ इस प्रकार हैं।

1. वजन घटाने में मददगार

बढ़े हुए वजन को कम करने में अलसी का उपयोग लाभदायक साबित हो सकता है। दरअसल, एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) द्वारा प्रकाशित एक शोध के मुताबिक अलसी डायट्री फाइबर का एक अच्छा स्रोत है। फाइबर की मौजूदगी के कारण यह शरीर में बढ़े हुए प्लाज्मा और कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद कर सकती है। साथ ही शरीर पर जमी अतिरिक्त चर्बी को कम करने में भी सहायक हो सकती है, जिससे वजन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

2. ब्लड प्रेशर को करे नियंत्रित

बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी तीसी खाने के फायदे उपयोगी साबित हो सकते हैं। कनाडा के सेंट बोनीफेस हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर द्वारा किए गए एक शोध में इस बात का जिक्र मिलता है। शोध में माना गया कि अलसी में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड, लिग्नैंस और डायट्री फाइबर संयुक्त रूप से एंटीहाइपरटेंसिव (ब्लड प्रेशर कम करने वाला) प्रभाव प्रदर्शित कर सकते हैं। इसी प्रभाव के कारण अलसी का सेवन ब्लड प्रेशर की समस्या से झूझ रहे रोगी को राहत पहुंचा सकता है । ऐसे में यह माना जा सकता है कि बढ़े हुए ब्लड प्रेशर के उपचार के तौर पर अलसी के बीज के फायदे हासिल किए जा सकते हैं।

3. डायबिटीज में पहुंचाए राहत

डायबिटीज की समस्या की बात करें, तो इस समस्या से पीड़ित रोगियों के लिए भी अलसी खाने के लाभ कारगर साबित हो सकते हैं। जर्नल ऑफ फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा अलसी पर किए गए एक शोध में इस बात को माना गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि अलसी में मौजूद फाइबर और म्यूसिलेज (गोंद जैसा लसलसा पदार्थ) की मौजूदगी के कारण यह शरीर में इन्सुलिन की मात्रा को नियंत्रित कर सकती है। इसी प्रभाव के कारण शोध में माना गया है कि अलसी में एंटीडायबिटिक (ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाला) प्रभाव मौजूद होता है।

4. सर्दी-खांसी में कारगर

सर्दी-खांसी के प्राचीन घरेलू उपचार के तौर पर अलसी को एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। यह बात अलसी से संबंधित जर्नल ऑफ फार्मासूटिकल एंड साइंटिफिक इनोवेशन के एक शोध से सामने आती है। शोध में माना गया कि अलसी सर्दी-खांसी में आराम दिलाने का काम कर सकती है। वहीं, शोध में इस बात का भी जिक्र मिलता है कि अत्यधिक खांसी या ब्रोंकाइटिस (फेफड़ों में सूजन की एक स्थिति) की समस्या में अलसी की चाय फायदेमंद साबित हो सकती है। 

5. कोलेस्ट्रॉल को कम करे

बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल की स्थिति को नियंत्रित करने में भी अलसी के बीज के फायदे लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं। यह बात एनसीबीआई के एक शोध से प्रमाणित होती है। शोध में माना गया कि पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (नसों का पतला होना) और कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं का उपयोग करने वाले लोगों में अलसी सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर सकती है। इस तरह यह हृदय से संबंधित जोखिमों को दूर रखने में भी सहायक साबित हो सकती है। इस आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि अलसी खाने के लाभ के तौर पर बढ़े हुए कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

6. हृदय के लिए फायदेमंद

अन्य स्वास्थ्य लाभों के साथ ही अलसी खाने के फायदे हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी सहायक हो सकते हैं। कनाडा के सस्केचेवान विश्वविद्यालय के फिजियोलॉजी विभाग द्वारा किए गए एक शोध में इस बात को स्वीकार्य किया गया है। दरअसल, अलसी में मौजूद लिगनेन कॉम्प्लेक्स (flax lignan complex) और सेकोआइसोलैरिकइरेसिनोल डाईग्लूकोसाइड (Secoisolariciresinol Diglucoside) इस काम में मुख्य भूमिका निभा सकते हैं। शोध में माना गया कि सेकोआइसोलैरिकइरेसिनोल डाईग्लूकोसाइड में हाइपोटेंसिव (ब्लड प्रेशर कम करने वाला) गुण मौजूद होता है। वहीं, लिगनेन कॉम्प्लेक्स और सेकोआइसोलैरिकइरेसिनोल डाईग्लूकोसाइड हृदय की नसों में पैदा होने वाले अवरोध (Atherosclerosis) के जोखिमों को कम कर सकते हैं। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि तीसी खाने के फायदे काफी हद तक हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी सहायक साबित हो सकते हैं।

7. गर्भावस्था में अलसी

अलसी के बीज के फायदे गर्भावस्था में भी कारगर सिद्ध हो सकते हैं। दरअसल, साल 2015 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल पैथोलॉजी द्वारा अलसी के तेल पर किए शोध में इसे गर्भावस्था के लिए फायदेमंद माना गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि बढ़े हुए बल्ड शुगर के प्रभाव को कम कर यह बच्चे के विकास और उसके सामान्य वजन को बनाए रखने में मदद कर सकती है। कारण यह है कि अलसी के तेल में गर्भावस्था के लिए जरूरी ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। इसके साथ ही इसमें अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं, जो गर्भावस्था के लिए जरूरी हैं। वहीं, इसके विपरीत एनसीबीआई के एक शोध, जो कि साल 2013 में किया गया था, उसमें गर्भावस्था या गर्भावस्था के बाद के समय में अलसी का अधिक सेवन करने से स्तन कैंसर होने की आशंका जताई गई है ।

साल 2015 की रिपोर्ट अलसी को गर्भावस्था के लिए लाभदायक करार देती है। इस लिहाज से हम गर्भावस्था के दौरान अलसी या अलसी के तेल के सेवन को कुछ हद तक लाभदायक कह सकते हैं। फिर भी दूसरे शोध में सामने आई स्तन कैंसर की आंशका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए, गर्भावस्था या स्तनपान के समय में अलसी का सेवन करने से पूर्व डॉक्टर से सलाह लेना ही बेहतर होगा।

8. लिवर के लिए लाभकारी

अलसी का उपयोग कर नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज से ग्रस्त रोगियों को भी राहत मिल सकती है। दरअसल, अलसी से संबंधित एनसीबीआई के एक शोध में इस बात का जिक्र मिलता है। शोध में पाया गया कि अगर खान-पान और दैनिक दिनचर्या में संतुलन के साथ अलसी का सेवन किया जाता है, तो फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहे लोगों को काफी हद तक राहत मिल सकती है । वहीं, इससे संबंधित एक अन्य शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर अलसी लिवर स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकती है। इस काम में अलसी में मौजूद अल्फा-लिनोलेनिक एसिड और लिनोलेनिक एसिड मुख्य भूमिका अदा कर सकते हैं। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि लिवर स्वास्थ्य को बनाए रखने में अलसी के बीज खाने के फायदे लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं।

9. कैंसर से करे बचाव

अलसी के बीज खाने के फायदे में कैंसर के जोखिमों को कम करना भी शामिल किया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अलसी में सेकोआइसोलैरिकइरेसिनोल (Secoisolariciresinol) नाम का एक खास तत्व पाया जाता है। इसी खास तत्व की मौजूदगी के कारण ही अलसी एंटीकैंसर (कैंसर के प्रभाव को कम करने वाला) गुण प्रदर्शित कर सकती है। यह गुण मुख्य रूप से हार्मोन में गड़बड़ी से होने वाले कैंसर (जैसे:- स्तन कैंसर, गर्भाशय के कैंसर और स्पर्म ग्रंथि के कैंसर) के जोखिम को कम करने में सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है। इतना ही नहीं, इसके साथ ही शरीर के अन्य विभिन्न भागों में होने वाले कैंसर के ट्यूमर की वृद्धि को कम करने में भी यह सहायक साबित हो सकती है ।

इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि कैंसर के बढ़ते प्रभाव में अलसी के बीज के फायदे कुछ हद तक सहायक साबित हो सकते हैं। हालांकि, आपको ध्यान रखना होगा कि कैंसर एक घातक बीमारी है। इसलिए, कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टरी उपचार अतिआवश्यक है। वहीं, कैंसर के लिए अलसी के उपयोग से पहले डॉक्टरी परामर्श भी अवश्य ले लें।

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