जानिए क्या है सच, शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले करीगरों के हाथ क्यों कटवा दिए थे?

प्यार का प्रतीक’ माने जाने वाले ताजमहल की खूबसूरती जितनी चर्चा में रहती है उतनी ही इसके बनने की कहानियां चर्चा में रहती हैं। ताजमहल को बनाने को लेकर अलग-अलग मिथ हैं। कहा जाता है कि मुमताज की याद में बनायी गई इस खूबसूरत इमारत जैसी कोई और इमारत ना बने इसलिए शाहजहां ने कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे। ताजमहल को बनाने में करीब 20 हजार मजदूरों ने योगदान दिया था। और इसका काम करीब 22 साल तक चला।

हालांकि कारीगरों के हाथ कटवाने की एक

और भी कहानी बताई जाती है। माना जाता है कि शाहजहां ने कारीगरों के हाथ नहीं कटवाए थे बल्कि उनसे ताउम्र काम न करने का वादा लिया था। जिसके बदले में उन्हें जिंदगी भर वेतन दिया गया था। वहीं एक मिथक ये भी है कि शाहजहां ने ताजमहल ख्वाब में देखकर बनवाया था, लेकिन ताजमहल के नक्शे के हिसाब से इतिहासकारों की मानें तो इसके डिजाइन के लिए पूरी दुनिया के वास्तुशास्त्रों की मदद ली गई थी। लेकिन इसका सटीक डिजाइन किसने तैयार किया था, इसके बारे में कोई सबूत नहीं है। ताजमहल को लेकर ऐसे ही कई मिथक हैं जिनके बारे में कई तरह की कहानियां कही जाती हैं।

बता दें कि ताजमहल शाहजहां की तीसरी बेगम मुमताज महल की मज़ार है। मुमताज के गुज़र जाने के बाद उनकी याद में शाहजहां ने ताजमहल बनवाया था। कहा जाता है कि मुमताज़ महल ने मरते वक्त मकबरा बनाए जाने की ख्वाहिश जताई थी जसके बाद शाहजहां ने ताजमहन बनावाया। ताजमहल को सफेद संगमरमर से बनवाया गया है। इसके चार कोनों में चार मीनारे हैं। शाहजहां ने इस अद्भूत चीज़ को बनवाने के लिए बगदाद और तुर्की से कारीगर बुलवाए थे। माना जाता है कि ताजमहल बनाने के लिए बगदाद से एक कारीगर बुलवाया गया जो पत्थर पर घुमावदार अक्षरों को तराश सकता था।

इसी तरह बुखारा शहर से कारीगर को बुलवाया गया था, वह संगमरमर के पत्थर पर फूलों को तराशने में दक्ष था। वहीं गुंबदों का निर्माण करने के लिए तुर्की के इस्तम्बुल में रहने वाले दक्ष कारीगर को बुलाया गया और मिनारों का निर्माण करने के लिए समरकंद से दक्ष कारीगर को बुलवाया गया था। और इस तरह अलग-अलग जगह से आए करीगरों ने ताजमहल बनाया था।

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