जानिए बुलेट प्रूफ कांच गोली को कैसे रोक लेती है?

इसे समझने के लिए पहले यह कांच कैसे बनता है यह समझते है:

बुलेट प्रूफ कांच मूल रूप से साधारण कांच की अनेक परतों के बीच पॉली-कार्बोनेट की एक परत डालकर बनाया जाता है।इस प्रक्रिया को आमतौर पर लैमिनेशन कहा जाता है।

पॉली कार्बोनेट ग्लास को एक असामान्य मजबूती और लचीलापन प्रदान करता है।

कांच के बीच सैंडविच किये गई कुछ अन्य पदार्थो में आर्मर्मैक्स, मैक्रोक्लियर, साइरोलन, लेक्सन और टुफाक शामिल हैं। आमतौर पर, बुलेट-प्रूफ ग्लास मोटाई में ७ से ७५ मिमी के होते है।

आखिर ये कांच बुलेट कैसे रोक लेता है :

जब बुलेटप्रूफ ग्लास पर गोली चलाई जाती है, तो इसकी बाहरी परत में छेद हो जाता है, लेकिन अंदर मौजूद पॉलीकार्बोनेट की परत बुलेट की ऊर्जा को सोख लेती है और बाकि परतो में बाट देती है। (इन्हे प्लास्टिक परते भी कहा जाता है। )

इससे बुलेट की ऊर्जा एक लक्ष्य पर केंद्रित न होकर बड़े एरिया में फ़ैल जाती है ,

जिससे बुलेट का प्रभाव कम हो जाता है।

इस प्रकार, गोली अंतिम परत को पार करके बाहर निकलने में असमर्थ हो जाती है.

आधुनिक बुलेटप्रूफ कांच केवल लेमिनेटेड सेफ्टी कांच का एक मॉडिफाइड स्वरुप है,और इसका आविष्कार ग्लास्सडोरार्ड बेनेडिक्टस ( १८७८ -१९३० ) नामक एक फ्रांसीसी रसायनशास्त्रज्ञ द्वारा किया गया था, जिन्होंने १९०९ में इस विचार पर एक पेटेंट लिया था।

उनके मूल संस्करण में सेल्युलाइड (एक प्रारंभिक प्लास्टिक) का उपयोग किया गया था कांच की दो चादरों के बीच सैंडविच के जैसे। १९३६ से कांच के टुकड़ो में पॉलीविनाइल प्लास्टिक का उपयोग करने का विचार, पहली बार पिट्सबर्ग प्लेट ग्लास कंपनी के अर्ल फिक्स द्वारा प्रस्तावित किया गया था।

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