जाम्बवती का पुत्र कौन था ? जाम्बवती और कृष्ण की कहानी क्या है?

स्यामंतका एक बहुमूल्य हीरा था, जो सूर्य देवता का था। यादवों के समुदाय से संबंधित सतराजित नाम के एक महानुभाव ने भगवान सूर्य से यह चमकदार हीरा के लिए तपस्या किया । अपने भक्त की प्रार्थना से प्रसन्न होकर सूर्य ने उन्हें वो हीरा भेंट किया। सतजीत यत्रव साम्राज्य की राजधानी द्वारका में वह हीरा लेकर लौटा। श्रीकृष्ण ने उन्हें यादवों के सर्वोच्च नेता उग्रसेन को गहना भेंट करने का अनुरोध किया। सतजीत ने ऐसा नहीं किया।

सतजीत ने मणि अपने भाई प्रसेन को दे दी। एक बार वह शिकार के लिए जंगल में गया, लेकिन दुर्भाग्य से एक शेर द्वारा उसे मार दिया गया। और बदले में शेर को एक भालू (जाम्बवान) ने मार दिया और भालू ने उस हीरा को अपनी बेटी जाम्बवती को भेंट कर दिया।

दूसरी ओर, भगवान कृष्ण पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने वह गहना पाने के लिए प्रसेन को मार डाला । अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए, वह खुद जंगल में चले गए । वह बीच जंगल मेंगए और एक गुफा देखा जहाँ से एक अद्भुत रोशनी आ रही थी। उन्होंने महसूस किया कि यह मणि की चमक थी। वे वहां गए और एक भालू ने उन्हें देखा और लड़ने लगा।

कुछ दिनों के बाद, भगवान कृष्ण ने जाम्बवान को हरा दिया और जल्दी हीं उसे एहसास हुआ कि वह वास्तव में कौन थे ।

उसे यह पता चल गया कि वह त्रेता युग के भगवान राम थे जो पृथ्वी पर फिर से प्रकट हुए हैं । इस प्रकार, भगवान कृष्ण ने उन्हें आशीर्वाद दिया और जाम्बवान ने अपनी बेटी और मणि श्री कृष्ण को उपहार में दी।

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