ज्यादातर मौतें रात को 3 बजे के करीब ही क्यों होती हैं? जानिए

रात में वो भी लगभग तीन बजे के आसपास अस्‍थमा के अटैक की संभावना 300 गुना बढ़ जाती है। दरअसल इस समय श्वसनतंत्र सूजन की वजह से ज्यादा सिकुड़ जाता है। साथ ही इस सूजन को कम करने में सहायक एंटी इंफ्लेमेट्री हार्मोंस का उत्सर्जन घट जाता है। इसके अलावा चिकित्सक बताते हैं रात के तीसरे पहर में ब्लडप्रेशर भी सबसे कम होता है।

इसलिये इस समय अचानक आंख खुलना, तेज पसीना आना, दिल की धड़कन तेज होना, हाथ-पैर ठंडे पड़ना आदि महसूस होता है।

यही वजह है कि रुग्ण शरीर के लिये ये समय प्राण घातक हो जाता है।

दूसरी ओर भूत प्रेत आदि के किस्से और पैरानारमल एक्सपर्ट इस समय को अशुभ मानते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि इस समय शैतान की ताकत चरम पर होती है और इंसान की बेहद कमजोर।

वैसे भारतीय जीवन शैली में ये समय ब्रह्ममुहूर्त का माना जाता है। आज भी हमारे अनेक बुज़ुर्ग इस समय बिस्तर छोड कर ईश्वर की भक्ति एवं आराधना में लिप्त हो जाते हैं।

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