टाइपराइटर और कीबोर्ड के बारे में कम ज्ञात बातें क्या हैं?

कंप्यूटर, स्मार्टफोन, और लैपटॉप, सब के कीबोर्ड ABCDEF की बजाए QWERTY फॉर्मेट में क्यों होते हैं? शायद आप में से कुछ लोगों ने कोई कारण सुना होगा।

लेकिन QWERTY फॉर्मेट के साथ दो कहानियां जुड़ी हुई हैं:

QWERTY फॉर्मेट का कारण टाइपराइटर हैं जो बीते समय में इस्तेमाल किए जाते थे।

पहला किस्सा, जो अधिकतर लोगों द्वारा स्वीकार किया गया है:

नीचे टाइपराइटर की तस्वीर में आप देख सकते हैं कि टाइपराइटर में हर अक्षर के लिए धातु की एक पतली डंडी होती है जो key दबाने पर कागज के ऊपर लगती है और वापिस अपने स्थान पर आ जाती है।

लगभग 45 अक्षरों और चिन्हों के लिए 45 डंडियाँ एक साथ लेटी रहती हैं।

19वीं सदी में क्रिस्टोफर शोल्स जब टाइपराइटर के अक्षरों का फॉर्मेट विक्सित कर रहे थे, उनके सामने मुख्य समस्या थी कि पहले टाइपराइटरों में ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले अक्षर एक साथ स्थित होते थे, जिस वजह से एक साथ स्थित अक्षरों की डंडियां आपस में टकरा जाती थीं और इससे टाइपिंग सही से नहीं हो पाती थी।

इस वजह से क्रिस्टोफर ने ऐसे अक्षरों को एक साथ रखना शुरू किया, जो एक साथ कम ही इस्तेमाल होते थे। ऐसा करने पर अक्षरों की डंडियों के टकराने की संभावना बहुत कम हो जाती। इस तरह से QWERTY फॉर्मेट बनाया गया, जो 19वीं सदी से अब तक चल रहा है।

दूसरा किस्सा:

2011 में शोधकर्ताओं कोइची यासुओका और मोटको यसुओका ने दावा किया कि QWERTY फॉर्मेट इस लिए बनाया गया था क्योंकि उस समय के टेलीग्राम ऑपरेटरों को पुराना फॉर्मेट इस्तेमाल करने में दिक्कत होती थी।

टेलीग्राम एक मशीन थी जिसके माध्यम से 19वीं सदी में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को सन्देश भेज सकता था, जैसे आज का SMS। टेलीग्राम में अक्षरों की जगह मोर्स कोड इस्तेमाल होता था, जिसमें हर अक्षर के लिए बिंदु और डैश इस्तेमाल होते थे।

बिंदु और डैश के इस्तेमाल से सन्देश लिखना कठिन था, इस लिए टेलीग्राम ऑपरेटरों को एक टाइपिंग फॉर्मेट की आवश्यकता थी।

टेलीग्राफ

टेलीग्राफ चलाता हुआ ऑपरेटर

दूसरी कहानी के अनुसार टेलीग्राफ ऑपरेटरों के लिए अक्षरों का क्रम आसान बनाने के लिए QWERTY फॉर्मेट बनाया गया था।

मजेदार तथ्य: “Typewriter” शब्द को नए फॉर्मेट की सिर्फ पहली पंक्ति से टाइप किया जा सकता है।

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