टेलीविजन का अविष्कार किसने किया था? जानिए

आज TV की खोज हुए लगभग 95 वर्ष हो चुके हैं। इन 9 दशकों में यह हमारे मनोरंजन तथा देश-विदेश में हो रही घटनाओं को जानने का महत्वपूर्ण जरिया बन गया है। भले ही इन दशकों में इसका स्वरूप और तकनीक पूर्णरूप से बदल चुका है लेकिन आज भी इसके कार्य करने का मूलभूत सिद्धांत पूर्व जैसा ही है। इस महत्वपूर्ण यंत्र का निर्माण किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं हुआ लेकिन फिर भी क्या आपको पता है, इसको सफलतापूर्वक बनाने वाले पहले वैज्ञानिक कौन थे? तो बता दे, इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले व्यक्ति थे स्कॉटिश इंजीनियर और अन्वेषक जाॅन लाॅगी बेयर्ड।

ये पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने 26 जनवरी, 1926 को ब्रिटेन के लंदन शहर में स्थित रॉयल इंस्टीट्यूशन से लंदन के पश्चिम में स्थित एक स्थान ‘सोहो’ में टेलीविजन संदेशों का सफल प्रसारण करके दिखाया था। वर्ष 2006 में बेयर्ड को इतिहास के 10 सबसे महान स्कॉटिश वैज्ञानिकों की सूची ‘स्कॉटिश साइंस हाॅल आफ फेम’ में राष्ट्रीय पुस्तकालय,स्कॉटलैंड द्वारा शामिल किया गया।

लाॅगी बेयर्ड वे पहले इंसान थे जिन्होंने 2 अक्टूबर, 1925 को पहली बार टी.वी. पर एक अलग-अलग आवाज निकालने वाले काठ के पुतले की छवि को प्रसारित करके दुनिया को दिखाया था। जैसा कि आप ऊपर की तस्वीर में देख सकते है।

बेयर्ड अपने नये खोज को लेकर इतने उत्साही थे कि इसे दुनिया के सामने लाने के लिए वे सीधे Daily Express (इंग्लैंड में प्रकाशित होने वाला समाचार पत्र) के ऑफिस पहुंच गए। हालाँकि, वहां का संपादक उन्हें ऐसे उपकरणों के साथ देख काफी डर गया और अचानक अपने रिपोर्टर से कहा –

टेलीविजन के शुरुआती वर्षों में एचडी टीवी. शब्द 405-लाइन टेलीविजन प्रसारण के लिए किया जाता था, जिसकी शुरुआत इंग्लैंड में 1936 में की गई थी। हालाँकि, उस समय के एचडी टीवी. की अवधारणा की तुलना आज के एचडी टीवी. के पिक्चर क्वालिटी से बिल्कुल नहीं कि जा सकती!

सन् 1967 से लेकर 1998 तक बीबीसी जब भी किसी चैनल पर कोई कार्यक्रम प्रसारित नहीं कर रहा होता था तब हर चैनल पर 8 वर्ष की कॅरोल हेरसी की तस्वीर को एक ब्लैकबोर्ड और गुड्डे के साथ दिखाया जाता था। यह ब्रिटिश टीवी के इतिहास में सबसे अधिक समय तक देखी जाने वाली तस्वीर है। (आप इसे ऊपर कि तस्वीर में देख सकते है)

1980 के दशक में जब पूरी दुनिया बड़े आकार की टीवी सेट को अच्छा मानती थी, वही दूसरी ओर सोनी कंपनी इसके उलट सोचती थी। इस कंपनी ने 1982 में पॉकेट साइज टेलीविजन का निर्माण किया था, जिसका नाम – Sony Watchman FD-210 था। जिसमें एक 5 सेमी. का डिस्प्ले लगा हुआ करता था।

पहली बार ‘टेलीविजन’ शब्द का प्रयोग वर्ष 1900 में रूस के वैज्ञानिक Constantin Perskyi द्वारा किया गया था।

भारत में टेलीविजन का इतिहास (Doordarshan in India)

हमारे देश में टीवी प्रसारण का आरम्भ 15 सितंबर, 1959 को दिल्ली से हुआ था। इसे एक प्रयोगात्मक प्रसारण के रूप शुरू किया गया था, जिसे एक कम क्षमता वाले ट्रांसमीटर से दिल्ली के ही 21 कम्युनिटी टीवी सेट पर प्रसारित किया जाता था।

1959 में इसे All India Radio की निगरानी में शुरू किया गया। जिस पर हर हप्ते एक-एक घंटे के दो कार्यक्रम दिखाये जाते थे। हर दिन 1 घंटे की समाचार-बुलेटिन की शुरूआत 1965 में कि गई।

मुंबई शहर में दूरदर्शन की शुरुआत 1972 में की गई तथा 1975 तक इसकी पहुंच देश के अन्य प्रमुख शहरों, जैसे – कोलकाता, चेन्नई, श्रीनगर, अमृतसर और लखनऊ तक हो गई।

1976 में ‘दूरदर्शन’ को ‘ऑल इंडिया रेडियो’ से अलग कर एक स्वतंत्र प्रसारण संस्था का रूप दे दिया गया । ये आज मुलभूत सुविधाओं, जैसे स्टूडियो और ट्रांसमिटर कि संख्या के आधार पर विश्व की सबसे बड़ी टेलीविजन प्रसारण संस्था (broadcasting origination) है।

सन् 1982 में दूरदर्शन ने पहली बार 9वें एशियन गेम्स का सीधा प्रसारण उपग्रह INSAT 1A के माध्यम से पूरे देश में किया। यह दूरदर्शन के इतिहास में सबसे बड़ी उपलब्धि थी।

अंत में एक और प्रश्न … TV पर रंगीन चित्र कैसे बनते हैं?

CRT टेलीविजन स्क्रीन पर तस्वीर और कुछ नहीं बल्कि चमकते बिंदुओं या पिक्सल का पैटर्न है। पिक्सेल फास्फोरस नामक प्रतिदीप्तिशील (fluorescent) रसायनों के बने होते हैं, स्क्रीन के पीछे जिसकी परत चढ़ी होती है। ये इलेक्ट्रॉन बीम के टकराते ही चमकने लगते हैं।

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