तुलसी के पत्ते तोड़ने से पहले किस बात का ध्यान रखना चाहिए?

धार्मिक शास्त्रों में तुलसी को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। कहते हैं कि ये केवल हमारे लिए पूजनीय ही नहीं है बल्कि इसमें बहुत सारी बीमारियों का रामबाण इलाज भी है। तुलसी की जड़ से लेकर पत्तों में भी बहुत से गुण पाए जाते हैं। इसलिए हम लोग तुलसी की पूजा तो करते ही हैं, लेकिन इसके साथ-साथ पत्तों को औषधी के रूप में भी तोड़ा कर प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन पत्ते तोड़ते समय कुछ बातों को ध्यान में रखने की जरूरत होती है। तो ऐसे में अगर आप इनसे जुड़ी कुछ बातों को नहीं जानते हैं, तो आज हम आपको इन्हें तोड़ने से पहले ध्यान में रखने वाली कुछ बातों के बारे में बताएंगे।

दरअसल हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी को देवी लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि भगवान श्री हरि का पूजन तुलसी के बिना अधूरा माना जाता है। विष्णु से जुड़ी हर पूजा में तुलसी पत्र का प्रयोग अनिवार्य होता है।

शास्त्रों के अनुसार रविवार के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। ऐसा करने पर आप पाप के भागीदार बनते हैं।

तुलसी जी को नाखूनों से कभी नहीं तोड़ना चाहिए, नाखूनों के तोड़ने से अपराध लगता है।

जब शाम हो जाए तो तुलसी जी को छूना वर्जित होता है। क्योंकि सायंकाल के बाद तुलसी जी लीला करने जाती है। इसलिए इस अपराध से बचना चाहिए। यदि शाम के समय तुलसी के पत्ते तोड़ना जरूरी हो तो पहले पौधे को हिलाना चाहिए।

अमावस्या, चतुर्दशी और द्वादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

शास्त्रों में इस बात का प्रमाण है कि तुलसी जी वृक्ष नहीं है! साक्षात राधा जी का अवतार हैं। इसलिए प्रसाद स्वरूप अगर तुलसी मिल जाए तो उसे चबाकर नहीं खाना चाहिए।

भगवान शिव ने शंखचूड़ का वध किया था जिस कारण कभी भी शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए।

अगर घर में तुलसी का पौधा सूख जाता है तो उसे किसी पवित्र नदी, तालाब या कुएं में प्रवाहित कर देना चाहिए। तुलसी का मुरझाया पौधा रखना अशुभ माना जाता है।

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