त्रिजटा के पति का क्या नाम है? जानिए

टीवी पर नंबर वन बने हुए इस सीरियल में हुए हम सभी ने देखा कि किस तरह त्रिजटा अशोक वाटिका में रावण की कैद के दौरान समय समय पर सीता की मदद करती है. त्रिजटा राक्षसी को रावण ने प्रमुख गार्ड के रूप में वहां रखा था. वो बार-बार उन्हें दिलासा देती थीं. कम से कम दो बार रावण के प्रकोप से इस राक्षसी ने सीता को बचाया. जानते हैं रावण से युद्ध में जीत के बाद त्रिजटा का क्या हुआ.

त्रिजटा मुख्य साध्वी, राक्षसी प्रमुख थीं। … वह राक्षसी होने के बावजूद सीता जी की दाता थी। लंका की शक्ति मंदोदरी के हाथों में थी जब रावण बाहर था और मंदोदरी ने रावण को सीता के साथ महल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी थी। त्रिजटा सीता जी बार बार ढाढस बधाती थी और वो उनको विश्वास दिलाती थी कि प्रभु श्रीराम आयेगे एक दिन जरूर आएगी तुमको डरने की जरूरत नहीं है ।

अशोक वाटिका में सीता जी के साथ अगर किसी को लगाव थे वो सिर्फ त्रिजटा ही थी। सीता जी अपना दुख दर्द बेवासी सिर्फ त्रिजटा से ही कहती थी।

जिस दौरान लंका में राम और रावण की सेनाओं के बीच युद्ध हो रहा था, तब त्रिजटा अपने स्रोतों से मिल रही तमाम जानकारियों को सीता तक पहुंचती थी। जब रावण ने कभी माया के माध्यम से सीता को भयभीत करने की कोशिश की तब भी त्रिजटा ने सीता को सही बात बताई। जब युद्ध के दौरान राम और लक्ष्मण पर मुसीबत आती थी, तो त्रिजटा ही वहां सीता को आश्वस्त करती हुई थी। उसने सीता से ये भी कहा कि उसने सपना देखा है और उसके अनुसार युद्ध में राम की जीत होगी।

रामचरितमानस के अनुसार – विभीषण की पुत्री थी

रामचरितमानस में कहीं ये भी उल्लेख मिलता है कि रावण के भाई विभीषण की पुत्री थी और त्रिजटा की माता का नाम शारमा था। अगर इस रिश्ते से देखा जाए तो वह रावण की भतीजी लगती थी। जब सीता जी को इस जेल में विरह को सहन करना मुश्किल लगा, तो उन्होंने अपने प्राण त्यागने की बात कही। उन्होंने त्रिजटा को एक चिता बनाने और उसे दंडित करने और उसे आग लगाने के लिए कहा। ऐसी स्थिति में, त्रिजटा ने समझदारी से सीता को यह कहकर टाल दिया कि इतनी रात में आग कहाँ मिलेगी। इसके अलावा, रावण को दो अवसरों पर गुस्सा आया और उसने सीता को मारना चाहा, तब भी त्रिजटा ने रावण को समझाया और सीता की रक्षा की।

रामायण इंडोनेशिया में प्रचलित है और कहानी के अनुसार -रामायण “रामाकीएन” में कहा गया है कि हनुमान ने विभीषण की बेटी त्रिजटा से शादी की थी. थाईलैंड में विभीषण को फिपेक और त्रिजटा को बेंचाकेई कहा जाता है. थाई रामायण कहती है कि हनुमान के साथ शादी से त्रिजटा को एक बेटा असुरपद हुआ था. यद्यपि वो राक्षस था लेकिन उसका सिर बंदर जैसा था.

रामायण के मलय वर्जन के अनुसार, युद्ध के बाद विभीषण ने हनुमान से अनुरोध किया कि वो उनकी बेटी से शादी कर लें. यहां त्रिजटा को सेरी जाती के रूप में जाना जाता है. हनुमान सहमत हो गए लेकिन उनकी एक शर्त थी. उनका कहना था कि वो इस शादी में त्रिजटा के साथ केवल एक महीने ही रहेंगे. इसके बाद हनुमान अयोध्या चले गए. त्रिजटा ने एक बेटे को जन्म दिया. जिसे हनुमान तेगनग्गा (असुरपद) कहा जाता है. जावा औऱ सूडान में रामायण के कठपुतली नाटकों में त्रिजटा को हनुमान की पत्नी के तौर पर दिखाया जाता है.

बनारस में त्रिजटा का मंदिर

वाराणसी में त्रिजटा का एक मंदिर है, जो यहां के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर के करीब है. यहां ये मान्यता है कि त्रिजटा लंका से सीता के साथ जब पुष्पक विमान से अयोध्या जा रही थी तो सीता ने उससे कहा कि अयोध्या में त्रिजटा को राक्षसी होने के कारण जाने की अनुमति नहीं मिलेगी.

इसके बाद सीता ने सुझाव दिया कि उसे वाराणसी चले जाना चाहिए, जहां उसको मोक्ष मिल जाएगा. फिर उसकी पूजा वहां एक देवी के रूप में की जाएगी.अब यहां मंदिर में त्रिजटा की रोज पूजा होती है. महिलाएं इस मंदिर में अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए आती हैं. यहां त्रिजटा को मूली और बैंगन का चढ़ावा चढ़ाया जाता है.

इसी तरह त्रिजटा का एक मंदिर उज्जैन में भी है, जो बालवीर हनुमान मंदिर परिसर में है. यहां देवी की तीनदिनों की विशेष पूजा होती है, जो कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होती है. तेलुगु में सीता पुराणमु रामासामी चौदारी में त्रिजटा को विभीषण औऱ गंधर्व शरमा की बेटी बताया गया है.

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