देवदासी प्रथा क्या थी और देवदासियों का क्या काम होता था? जानिए

देवदासी दक्षिन भारत के मन्दिरों मे ऐसे ही थीं जेसे चर्च मे नन होतीं हैं l चर्च मे भी लड़कियों को जीसस के साथ विवाह कराने की शपथ दिलाई जाती है और वहीं पर रहना पड़ता है

इस प्रथा के तहत कुंवारी लड़कियों को धर्म के नाम पर ईश्वर के साथ ब्याह कराकर मंदिरों को दान कर दिया जाता था. माता-पिता अपनी बेटी का विवाह देवता या मंदिर के साथ कर देते थे. परिवारों द्वारा कोई मुराद पूरी होने के बाद ऐसा किया जाता था.

देवता से ब्याही इन महिलाओं को ही देवदासी कहा जाता है. उसका काम देवता की सेवा करना होता था ,जो काम पुजारी करते हैं ,केवल पूजा पुजारी करता था बाकी सारा काम मन्दिर का देवदासियां ही करती थीं.

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