निकोला टेस्ला के किसी आविष्कार से जुड़ा रोचक अनसुना किस्सा क्या है? जानिए

निकोला टेस्ला ने 1898 में रेडियो कन्ट्रोल को एक खिलौना बता कर लोगों को यह विश्वास दिलाया कि वे अपने उसे अपनी आवाज़ से चला सकते हैं लेकिन असल मे निकोला टेस्ला खुद उस रेडियो को कंट्रोल कर रहे थें।

निकोला टेस्ला पर वेदांत दर्शन का प्रभाव :

स्वामी विवेकानंद जुलाई, 1893 में अमेरिका पहुंचे थे. इसी साल सितंबर में विश्व धर्म संसद का आयोजन हुआ जिसने विवेकानंद और हिंदू धर्म के वेदांत दर्शन को अमेरिकी बौद्धिक जगत के बीच पहुंचा दिया था. टेस्ला और एडीसन की प्रतिद्वंदिता और उनके आविष्कारों के भारी प्रचार के चलते इस दौर तक अमेरिका के सामान्य पढ़े-लिखे तबके में विज्ञान को लेकर जागरूकता और जिज्ञासा आ चुकी थी. इसी समय अमेरिका के वैज्ञानिक चेतना संपन्न समाज का परिचय वेदांत दर्शन से हुआ. दुनिया के सबसे प्राचीन धर्म का यह दर्शन कई मायनों इस समाज को वैज्ञानिक लगा. किसी भी वस्तु या घटना के मूल में एक परम सत्ता की उपस्थिति और प्रकृति के साथ जीवन की एकात्मता वेदांत दर्शन का ऐसा मूल सूत्र था जिसने वैज्ञानिक समुदाय को भी अपनी तरफ आकर्षित किया.

माना जाता है निकोला टेस्ला भी वेदांत दर्शन से काफी प्रभावित थे. 1907 में उन्होंने ‘मैन्स ग्रेटेस्ट अचीवमेंट’ शीर्षक के साथ एक आलेख लिखा था. इसमें उन्होंने ‘आकाश’ और ‘प्राण’ जैसे संस्कृत शब्दों का प्रयोग किया है, ‘जिन भी पदार्थों की अनुभूति की जा सकती है वे मूल रूप से एक ही तत्व या उस विरलता से निकले हैं जिसका कोई शुरुआत नहीं है, जिससे हर स्थान, आकाश या प्रकाशमान ईथर भरा हुआ है, जो जीवन देने वाले प्राण या रचनात्मक ऊर्जा से प्रभावित होता है…’

कहा जाता है कि टेस्ला की स्वामी विवेकानंद से मुलाकात हुई थी और इसके बाद उन्होंने वेदांत दर्शन पर गंभीरता से चिंतन शुरू किया था. हालांकि इसका कोई प्रमाण नहीं है लेकिन कुछ दस्तावेज इस तरफ इशारा करते हैं. इनमें पहला दस्तावेज खुद स्वामी विवेकानंद का एक पत्र है जो उन्होंने शायद टेस्ला से मुलाकात के कुछ दिन पहले लिखा था. इसमें वे कहते हैं, ‘मिस्टर टेस्ला सोचते हैं कि वे गणितीय सूत्रों के जरिए बल और पदार्थ का ऊर्जा में रूपांतरण साबित कर सकते हैं. मैं अगले हफ्ते उनसे मिलकर उनका यह नया गणितीय प्रयोग देखना चाहता हूं (विवेकानंद रचनावली, वॉल्यूम – V).’ विवेकानंद इसी पत्र में आगे कहते हैं कि टेस्ला का यह प्रयोग वेदांत की वैज्ञानिक जड़ों को साबित कर देगा जिनके मुताबिक यह पूरा विश्व एक अनंत ऊर्जा का रूपांतरण है.

इसके अलावा अतर्राष्ट्रीय टेस्ला सोसायटी के अध्यक्ष रहे टॉबी ग्रोट्ज का भी एक आलेख बताता है कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद और निकोला टेस्ला की मुलाकात हुई थी. हालांकि टेस्ला पदार्थ-ऊर्जा संबंध को गणित के माध्यम से स्थापित करने में कामयाब नहीं हो पाए थे लेकिन वेदांत दर्शन के प्रभाव के चलते वे इसे स्वीकार करते थे. बाद में अलबर्ट आइंस्टीन ने पदार्थ-ऊर्जा संबंध समीकरण को साबित किया था और यह एक तरह से वेदांत दर्शन के एक मूल विचार की स्थापना थी।

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