नीम की पत्तियों का उपयोग किस प्रकार और किन रोगों के लिए किया जा सकता है? जानिए

नीम भारत में लगभग सभी जगह पाया जानेवाला सदाहरित, बहुपयोगी वृक्ष है l इसका धार्मिक महत्त्व होने के साथ साथ चिकित्सा में अपना अलग ही महत्त्वपूर्ण स्थान है I इसके लगभग सभी अंगों का औषधीय उपयोग आयुर्वेद में पिछले हजारों सालों से होता आ रहा है।

चैत्र माह में नीम के पेड़ में नई पत्तियां निकलती हैं। इनका सेवन अनेक बीमारियोंको दूर करता है I इसका सेवन कुछ लोग कच्चा चबाकर ही करते हैं तो कुछ लोग इन्हें पानी में उबाल कर नमक के साथ खाते हैं।

रोजाना इसके सेवन से होते है ये फायदे :

१. डायबिटीज

भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है I ऐसे में नीम के कुछ पत्तों को सुबह खाली पेट चबाना रक्तगत शर्करा को नियंत्रित रखने में असरदार होगा I आधुनिक शोधकर्ताओं के मुताबिक नीम के पत्तों में स्थित azadirachtolide नामक तत्व रक्तगत शर्करा को कम करने सक्षम है I

२. रक्त शुद्धि

नीम के पत्ते जीवाणु और फंगस खत्म करने में फायदेमंद है। इसलिए इनका सेवन करना शरीर के खून को साफ करता है और शरीर के गंदे जीवाणु भी खत्म हो जाते हैं I शरीर की गर्मी को कम कर और अपने एंटी बैक्टीरियल गुणों के कारण यह बार बार होनेवाली फुंसी- फोड़ों की तकलीफ में भी फायदा पहुंचाता है l

३. संक्रमण को रखे दूर

नीम एंटी बायोटिक होने से सामान्य संक्रमण को रोकने में उपयुक्त है l खासकर मूत्रमार्ग और आँखों के संक्रमण में इसका सेवन फायदेमंद है I

४. कील-मुंहासों का करे इलाज

नीम की पत्तियां कील मुहांसों के कारण होनेवाले बैक्टीरिया को नष्ट करती है I इस लिए इनका सेवन करने के साथ चेहरे पर लेप भी कर सकते है I

५. त्वचा विकारों में

आयुर्वेद के अनुसार नीम पित्त और कफ को कम करता है I यह रक्त शुद्धिकर, एंटी बैक्टीरियल, एंटी ऑक्सीडेंट होने से एक्जिमा, सोरायसिस जैसे अनेक त्वचा विकारों में लाभदायी है I कफ को कम करने से खुजली, स्राव और शीत एवं पित्तनाशक होने से जलन को कम करता है l

२०० ग्राम नीम की पत्तियों को २ लीटर पानी में उबाले और पानी का रंग हरा हो जाने पर पानी को बोतल में छान कर रख ले। नहाने के वक्त बाल्टी में ७५ से १०० मिलीलीटर इस नीम के पानी को डाल दे। इससे संक्रमण, मुंहासे और शरीर से पुराने दाग- धब्बों से छुटकारा मिलने में मदत मिलती है।

६. पेट के लिए लाभदायक

पित्तनाशक होने से इसकी पत्तियों का सेवन एसिडिटी में उपयोगी है l कब्ज, पेट दर्द, आंतो में स्थित वर्म्स में भी यह उपयुक्त है l

७. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए भी यह उपयोगी है I

८. बुख़ार को करे कम

नीम बुखार को कम करने की अच्छी दवा है l इसके पत्तों में स्थित गेंडनिन (gedunin) नामक घटक मलेरिया के तेज बुखार को कम करने के साथ इसके इलाज में कारगर साबित हुआ है I इसलिए जिन लोगों को मलेरिया होता है उन्हें नीम के पत्ते खाने की राय दी जाती है l ठीक होने पर भी कुछ दिन इनको खाने से बीमारी वापस होने की संभावना कम हो जाती है l

९. बवासीर में दे राहत

नीम के पत्तों और मूंग दाल को मिलाकर पीस ले।इसे हल्के से तेल के साथ तलकर खाने से बवासीर के रोगीयों को अतिशीघ्र आराम मिलता है। इस दौरान भोजन में छाछ व चावल का सेवन करे और मसालों का प्रयोग ना करें।नीम और कनेर के पत्ते की समान मात्रा में लेकर प्रभावित अंग में ये लेप लगातार एक हप्ते तक लगाने से दर्द, सूजन कम हो जाती है।

१०. दस्त में आराम

नीम की पत्तियों को सुखाकर शक्कर मिलाकर खाने से दस्त में आराम मिलता है I पेट के कीड़ों को नष्ट करने के लिए नीम के पत्तों के रस में शहद और काली मिर्च मिलाकर दिया जाना चाहिए I

११. बढ़ाए रोग प्रतिरोधक शक्ति

नीम की पत्तियों का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने में मदत करता है l

खाने के साथ नीम के पत्तियों का चेहरे पर लेप लगाना मुहांसे, आँखों के नीचे के डार्क सर्कल, धूप से आनेवाला कालापन दूर कर चेहरे को निखारने में मदत करता है l

अपने कड़वेपन के कारण यह वात को बढ़ाता है । इसलिए ध्यान रखे की ज्यादा मात्रा में या लगातार इनका सेवन न करे l डायबिटीज के मरीज भी सावधनीपूर्वक इसका सेवन करे l

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