पितृपक्ष में क्या नहीं करना चाहिए

इस दौरान नए वस्त्र धारण करना या खरीदना भी निषेध माना गया है ऐसा करना भी आपको पितृदोष का भागीदार बना सकता है। झूठ बोलना, किसी का बुरा चाहना या करना जैसे अनैतिक काम भी इस दौरान ना करें।

पितृ-पक्ष में इस बात का भी ध्यान रखें कि ब्राह्मण को केवल मध्याह्म के समय ही भोजन कराएं।

पितृ पक्ष के दौरान पेड़-पौधे भी ना काटें क्योंकि वे भी सजीव हैं। ऐसा करने से भी पितृ-दोष का सामना करना पड़ता है जो आपके लिए कई संकट ला सकता है। नाराज पितर क्रोध में आकर आपको श्राप भी दे सकते हैं।

कई लोगों को बासी खाना खाने की आदत होती है लेकिन पितृपक्ष में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इन 16 दिनों में आप किसी भी प्रकार का बासी खाना ना खाएं। साथ ही संभव हो तो मांस या शराब का सेवन भी ना करें।

इस दौरान आपको पशु-पक्षी को भी भोजन और जल देना चाहिए। साथ किसी भी जीव को परेशान ना करें, अन्यथा आपके पितृजन आपसे नाराज हो सकते हैं। इस इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि आपके द्वारा गाय और ब्राह्मण का अपमान ना हो। गाय को ना तो परेशान करें और ना ही किसी प्रकार की चोट पहुंचाएं।

पितृ पक्ष के दौरान आपके द्वार पर आने वाले किसी भी अतिथि का अनादर ना करें। इन 16 दिनों में हो सकता है आपके पितर कोई रूप धारण कर आपके द्वार पर खड़े हो जाएं। इसलिए इस दौरान किसी भी भिक्षुक, अतिथि या किसी भी आगंतुक का अनादर ना करें।

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