प्राचीन भारत के महान वैज्ञानिक कौन से थे जानिए उनके नाम

1.आर्यभट्ट

भारत के महानतम वैज्ञानिक आर्यभट्ट की गिनती महान खगोल वैज्ञानिक में किया जाता हैं। उन्होनें बहुत से ब्रह्मांड के रहस्यों को रखा। जब दुनिया के कई देश गिनती भी ठीक से गिनना भी नहीं जानते थे। आर्य भट्ट को खगोल का महान पंडित माना जाता हैं। दुनिया यह जानती है कि सूर्य और पृथ्वी का संबंध बताने वाला पहला व्यक्ति निकोलस कपरनिक्स था लेकिन यह आर्यभट्ट ने इसे बहुत साल पहले बता दिया था।उन्होंने कहा था कि पृथ्वी सूर्य का परिक्रमा करती हैं और सभी ग्रह सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं।ये भी कहा थी कि पृथ्वी और चंद्रमा अपनी रोशनी से नहीं चमकते वो सूर्य की रोशनी से चमकते हैं।इस महान पंडित ने पृथ्वी का एकदम सही व्यास बताया था जो आज के से 65 मील ही गलत हैं। आर्यभट्ट ने समय और दूरी को अलग अलग बताया था।

आर्य भट्ट ने शून्य की भी खोज की थी।जिसके बिना गणित अधूरा हैं।

2.महर्षि कणाद

भारत के इतिहास में महर्षि कणाद को परमाणुशास्त्र का जनक कहा जाता हैं। इन्होंने सर डाल्टन से परमाणु सरंचना पहले ही बता दिया था और द्रव्य छोटे छोटे कणों से बना है। उन्होनें न्यूटन से पहले ही गति का नियम बता दिया था।

  1. बौधायन

बौधायन भारत के महान गनितियज्ञ और सुसंस्कृत के रचयिता थे। जो आज हमें ज्योमेट्री पढ़ाई जाती है और गनितियज्ञ यूक्लिड के खोज आधारित हैं।अपने पेथागोरस थरोएम पढ़ा होगा उसकी खोज भारत के महान गनितियज्ञ बौधायन ने 250 वर्ष पहले कर दी थी।

3.भास्कराचार्य

भास्कराचार्य भारत के महान गनितियज्ञ में से एक थे। इनके द्वारा रचित सोमणी, लीलावती,बीज गणित जैसे आदि ग्रंथ लिखे हैं। सब लोग जानते है कि गुरुत्वाकर्षण बल की खोज न्यूटन ने की थी लेकिन भास्कराचार्य ने इसे न्यूटन के जन्म के 800 वर्ष पहले ही बता दिया था। उन्होनें इसका उल्लेख अपने ग्रंथ सिध्दांत शिरोमणि में किया था।

  1. महर्षि सूश्रुत

महर्षि सुश्रुत शल्यक्रिया का जनक माना जाता हैं। 2600 साल पहले ये अपने स्वास्थ्य वैज्ञानिकों के साथ प्रशब मोतियाबिंद अंग लगाना पथरी का ईलाज आदि जैसे रोगों का उपचार करते थें।

शल्यक्रिया के सिध्दांत को प्रतिपादित किया था। आधुनिक विज्ञान 400 वर्ष पहले शल्यक्रिया करता हैं लेकिन महर्षि सुश्रुत ये 2600 वर्ष पहले शल्यक्रिया से लोगो का ईलाज करते थे।

महर्षि सुश्रुत ने अपनी एक ग्रंथ लिखी थी जिसका नाम सुश्रुत संहिता था। उसमें 126 प्रकार के शल्यक्रिया करने वाले उपकरण का उल्लेख हैं। इसका उपयोग आज के शल्यक्रिया में भी किया जाता हैं।यह ग्रंथ कई भाषों में अनुवाद किया गया।

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