पढ़े मजेदार कहानी एक किसान और बैल की

एक बार एक किसान अपने खेत में हल चला रहा था। सुबह से ही काम करने के कारण वह खुद को थका थका महसूस कर रहा था। इसलिए उसने सोचा कि थोड़ा आराम कर लो पर क्योंकि फसल बोनी थी।और वह और देरी नहीं चाहता था इसलिए वह हल को बैल के सहारे ही छोड़कर आराम करने लगा। लेकिन बाल तो ठहरा जानवर उसे इतनी समझ कहां।

वही खेत के पास में एक कुंवा सूखा पड़ा हुआ था। बैल चलते चलते उस कुएं के पास पहुंच गया और उसमें गिर गया। गिरने के बाद वह जोर से चिल्लाया तब जाकर किसान की आंख खुली उसने देखा कि बाल वहां पर नहीं है। वह भागा भागा कुएं के पास गया। वह जाकर देखता है कि बैल तो कुएं में गिर गया है। वह सोचने लगता है कि कैसे इसको बाह‌र लाया जाए। उसे कोई रास्ता नहीं सूझता है।अंत में वह यह निर्णय करता है कि बैल काफी पुराना और बूढ़ा हो गया इसका वैसे भी समय नजदीक है क्यों ना बाद में दफनाने की बजाय इसे अभी ही दफना दिया जाए। वह फावड़ा लेकर आता है और पास पड़ी मिट्टी को कुएं के अंदर फेंकना शुरू कर देता है। बैल यह सब देख कर हैरान हो जाता है।

अब आप लोग सोच रहे होंगे कि बैल तो बेचारा मर गए जाएगा और किसान कितना बुरा है जो जिंदगी भर उस से काम लिया और अब उसे दफनाने लगा है।

यहां पर बैल के पास दो रास्ते हैं एक वह कि वह अपने मालिक की यह है करनी देखकर अफसोस करके कुए के अंदर बैठ जाए और अपनी मौत को स्वीकार कर ले।

और एक रास्ता और है।

और हमारे बैल ने वही रास्ता अपनाया।चलिए बताता हूं आपको कि क्या किया हमारे बैल ने।

जैसे किसान बैल के ऊपर मिट्टी डालता, बैल उसे झाड़ कर जमीन में गिरा देता किसान फिर मिट्टी डालता बैल फिर उसे झाड़ कर जमीन में गिरा देता और उसके ऊपर खड़ा होता चला जाता है धीरे-धीरे क्या हुआ कि जो मिट्टी के सामने बैल को दफनाने के लिए गिराई थी वही मिट्टी बैल को सतह से ऊपर ले आई और बैल बच गया।

किसान भी यह देखकर बहुत खुश हुआ कि उसका बैल बच गया।

दोस्तों कहानी चाहे बैल की थी लेकिन सोचने वाली बात है कि अगर बैल उस वक्त हार मान कर बैठ जाता तो उसकी मौत निश्चित थी।पर उसने प्रयास किया और उसे उस वक्त तो वह रास्ता नहीं दिखा बचने का,पर जिस जिस तरह वह प्रयास करता गया।आगे आगे का रास्ता उसे दिखता चला गया,इसलिए वह बच गया।

हमारी जिंदगी भी बिल्कुल इस प्रकार ही है-ईश्वर हमें मुसीबतें देता है जो मिट्टी की भांति है,किसी को कम देता है किसी को ज्यादा देता है।अब यह हमारे ऊपर है कि हम अफसोस कर कर या दिल हार कर उस मिट्टी को अपने ऊपर जमने दे या बैल की तरह मेहनत करते रहें और क्या पता उस मुसीबत से निकलने का रास्ता हमें आज ना दिख रहा हो पर कल दिख जाए तो इसलिए हार मत मानो लड़ते रहो रास्ता अपने आप दिख जाएगा

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