बर्ड फ्लू कैसे फैलता है इंसानों में ?

दिसंबर 2020 में जापान साउथ कोरिया ,वियतनाम और चार यूरोपीय देशों में बर्ड फ्लू के मामले आने शुरू हुए थे और यह अब भारत के कई हिस्सों में फ़ैल चुका है ।आइए जानते है कि आखिर बर्ड फ्लू क्या और यह इंसानों को कैसे संक्रमित कर सकता है ।

नाम से यह स्पष्ट है कि यह पक्षियों में होने वाले वायरल इंफेक्शन है जिसे एवियन इन्फ्लूएंजा भी कहते है ।ये एक पक्षी से दूसरे पक्षी में फैलता है ।और पक्षियों को संक्रमित कर जान ले लेता है ।बर्ड फ्लू का सबसे जानलेवा स्ट्रेन H5N1 होता है।H5N1 वायरस से संक्रमित पक्षियों को मौत भी हो सकती है।ये वायरस संक्रमित पक्षियों से अन्य जानवरों और इंसानों में फ़ैल सकता है ,इनमें भी ये वायरस इतना ही खतरनाक है । यह वायरस पक्षियों के माध्यम से इंसानों में आ सकता है ।

इंसानों में बर्ड फ्लू का पहला मामला 1997 में हांग कांग में आया था।उस समय इसके प्रकोप कि वजह पोल्ट्री फॉर्म में संक्रमित मुर्गियों को बताया गया।1997 में बर्ड फ्लू से संक्रमित लगभग 60 फीसदी लोगो की मौत हो गई थी।ये बीमारी संक्रमित पक्षी के मल ,नाक के स्त्राव ,मुंह कि लार या आंख से निकलने वाली पानी के सम्पर्क में आने से होता है ।

H5N1 बर्ड फ्लू इन्सानों में होने वाले आम फ्लू की तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता है।एक इंसान से दूसरे इंसान में तभी फैलता है जब दोनों के बीच बहुत करीबी संबंध हो ।जैसे कि संक्रमित कि देखभाल करने वाला या फिर किसी परिवार के सदस्यों में फ़ैल जाना क्योंकि परिवार में सभी मिलकर रहते है ।

बर्ड फ्लू प्रवासी जलीय पक्षियों खासतौर से जंगली बतख से प्राकृतिक रूप से ये वायरस घरेलू मुर्गियो में फ़ैल जाता है । जंगली पक्षियों से ये बीमारी सूअरों और गधों तक भी फ़ैल जाता हैं।साल 2011तक ये बीमारी बांग्लादेश ,चीन,मिस्त्र, भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम में फ़ैल चुका था।

बर्ड फ्लू इंसानों में तभी फैलता है जब वो किसी संक्रमित पक्षी के सम्पर्क में आया है ।ये करीबी सम्पर्क कई मामलों में अलग अलग हो सकता हैं।कुछ लोगो मे ये संक्रमित पक्षियों कि साफ सफाई से फ़ैल सकता है कुछ रिपोर्ट के मुताबिक चीन में ये पक्षियों के बाजार से फैलता है ।चीन में तरह तरह कि पक्षियों एवम् जानवरों का बाजार लगता है जिसमे इन्हें बेच दिया जाता है।जैसे किसी देश सब्जी का बाजार लगता है उसी प्रकार।

संक्रमित पक्षियों से दूषित पानी में तैरने नहाने या मुर्गो और पक्षियों कि लड़ाई छुड़वाने वाले लोगो मे भी बर्ड फ्लू का संक्रमण हो सकता है ।इसके अलावा संक्रमित जगहों में जाने वाले,कच्चा या अधपका मुर्गा अंडा खाने वाले लोगो मे भी बर्ड फ्लू फैलने का खतरा होता है H5N1 में लंबे समय तक जीवित रहने की क्षमता होती हैं।संक्रमित पक्षियों के मल और लार मे ये वायरस 10 दिनों तक जिंदा रहता है ।

बर्ड फ्लू के निम्न लक्षण हो सकते है –

बर्ड फ्लू होने पर अपको कफ ,डायरिया,बुखार ,सांस से जुड़ी दिक्कत ,सिर दर्द , मासपेशियों में दर्द ,गले में खराश ,नाक बहना और बेचैनी जैसी समस्या हो सकती हैं।अगर आपको लगता हैं कि आप बर्ड फ्लू की बीमारी का शिकार हो गए हो तो किसी और के सम्पर्क मे आने से पहले डॉक्टर को आवश्यक रूप से दिखाए।

बर्ड फ्लू का इलाज एंटीवायरल दवाओं से किया जाता है ।लक्षण दिखने के 48 घंटो के भीतर इसकी दवाएं लेनी जरूरी होती है ।बर्ड फ्लू से संक्रमित व्यक्ति के अलावा ,उसके सम्पर्क में आए घर के अन्य सदस्यों को भी ये दवाएं ली जाने कि सलाह दी जाती है ,भले ही उन लोगो मे बिमारी के लक्षण ना हो।

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