बर्फ़ बारी की वजह से केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं, तो उस दौरान बाबा केदारनाथ जी की पूजा कैसे होती है?

केदारनाथ धाम पर्वतों पर इतनी ऊंचाई पर स्थित हैं, जहां सर्दी का मौसम शुरू होते ही हिमपात होने लगता है।पवित्र देवालय बर्फ की सफेद चादर से ढक जाते हैं और वहां पहुंचना संभव नहीं रहता। लेकिन ईश आराधना कभी नहीं थमती। यही कारण है कि सदियों से इन देवालयों के साथ एक परंपरा जुड़ी हुई है।

शीत ऋतु में जब इन मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं तो भगवान के विग्रह को ऐसे स्थानों पर ले आया जाता है, जहां सरलता से पूजा-अर्चना की जा सके। जो लोग ग्रीष्म ऋतु में दर्शन नहीं कर पाते, वे सर्दियों में समय मिलने पर इन स्थानों पर पहुंच इष्टदेवों की पूजा करते हैं। भगवान का मूल विग्रह तो स्थायी रूप से मुख्य मंदिर में ही अवस्थित रहता है, किन्तु प्रतीक रूप में स्थापित की गई चल प्रतिमा को बड़े ही पारंपरिक ढंग से पालकी में विराजित करके इन देवालयों की ओर प्रस्थान किया जाता है।

सर्दियों के 6 महीनों मे भगवान की उत्सव डोली गौरीकुंड, गुप्तकाशी होते हुए ऊखीमठ ओंकारेश्वर मंदिर में लायी जाती है। जहा केदारपट खुलने तक केदारनाथ की पूजा-अर्चना ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में होती है।’ बहुरंगी छवि वाला यह मंदिर बहुत ही सुंदर है।

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