बाबा रामदेव की कंपनी ‘पतंजलि’ भी ले सकती है IPL की स्पॉन्सरशिप में भाग

आइपीएल 2020- जैसा कि आप सभी बखूबी जानते हैं कि बीसीसीआई कंपनी ने आईपीएल की स्पॉन्सरशिप से विवो कंपनी के साथ करार खत्म कर दिया है, विवो कंपनी के आईपीएल टाइटल स्पॉन्सर से हटने के बाद अब बीसीसीआई नए टाइटल स्पॉन्सर की खोज कर रही है, ऐसे में सुनने में आ रहा है कि बाबा रामदेव की पतंजलि भी आईपीएल की स्पॉन्सर की रेस में बोली लगा सकती है।

पतंजली के स्पोक्सपर्सन ने दी जानकारी-

पतंजली के स्पोक्सपर्सनएसके तिजारावाला ने इस बारे में जानकारी एजेंसी के साथ साझा की है, एसके तिजारावाला ने कहा है कि वो इस बारे में सोच रहे हैं, एसके तिजारावाला ने कहा कि पतंजलि को हम ग्लोबल ब्रैंड बनाना चाहते हैं, ऐसे में आईपीएल का मंच इसके लिए काफी कारगर साबित होगा| हालांकि उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में आखिरी फैसला कंपनी करेगी, हम सोच विचार करने के बाद ही इसपर आखिरी फैसला करेंगे। एसके तिजारावाला के अनुसार 14 अगस्त तक हम भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को इसके लिए प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

वीवो ने 2018 से 2022 तक पांच साल के लिये 2190 करोड़ रूपये में (प्रत्येक वर्ष 440 करोड़ रूपये) आईपीएल टाइटल प्रायोजन अधिकार हासिल किये| वीवो के जाने के बाद आईपीएल के टाइटिल स्पॉन्सर की रेस में जियो, एमेजॉन, टाटा ग्रुप, ड्रीम 11 और बायजूस जैसी कंपनी दिलचस्पी दिखा रही हैं।

बीसीसीआई अध्यक्ष गांगुली ने शैक्षिक किताबों के प्रकाशक एस चंद ग्रुप द्वारा शनिवार को आयोजित वेबिनार के दौरान कहा, ‘‘मैं इसे वित्तीय संकट नहीं कहूंगा| यह महज छोटा सा झटका है| उन्होंने कहा, ‘‘बीसीसीआई बहुत मजबूत संस्था है – बीते समय में खेल, खिलाड़ियों, प्रबंधकों ने इस खेल को इतना मजबूत बना दिया है कि बीसीसीआई इन सभी झटकों से निपटने में सक्षम है| पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा,‘‘ आप अपने अन्य विकल्प खुले रखते हो यह इसी तरह है जैसे पहली योजना और दूसरी योजना। समझदार लोग ऐसा करते हैं| समझदार ब्रांड ऐसा करते हैं, समझदार कॉरपोरेट ऐसा करते हैं।

बता दें कि, बीसीसीआई और वीवो ने भारत और चीन की सीमा पर हुई सैनिकों की भिड़ंत के कारण चीनी उत्पादों के बहिष्कार करने की बातों के चलते गुरूवार को 2020 आईपीएल के लिये अपनी भागीदारी निलंबित करने का फैसला किया है जो 19 सितंबर से संयुक्त अरब अमीरात में हो रही है| टाइटल प्रायोजन आईपीएल के व्यवसायिक राजस्व का वह अहम हिस्सा है जिसका आधा भाग सभी आठों फ्रेंचाइजी में बराबर बराबर बांटा जाता है।

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