बार बार फोन की बैटरी खत्म होने की समस्या का समाधान क्या है? जानिए

अगर आपने गौर किया होगा तो आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है बैटरी चार्ज करना। चाहे वो फोन की हो या इलेक्ट्रिक घड़ी की। हर कुछ घंटे के इस्तेमाल के बाद सामान की बैटरी ड्रेन हो जाती है और दोबारा से इसे चार्ज करने की जरूरत होती है। लेकिन अब आपको बैटरी चार्ज करने के झमेले से छुटकारा मिलने वाला है। अब एक ऐसी बैटरी बन चुकी है जिसे एक बार चार्ज करने पर आपको अगले 28 हजार साल तक चार्ज करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। अगर इस बैटरी को फोन, इलेक्ट्रिक घड़ी या इलेक्ट्रिक कार में लगा दिया जाए तो आपको फिर कभी भी इन्हें चार्ज नहीं करना पड़ेगा। यानी अब आपकी जिंदगी बदलने वाली है

आइये आपको बताते हैं इस ख़ास बैटरी की ख़ास बातें…

आज के समय में हमारा आधा समय अपने फोन, इलेक्ट्रिक घड़ी, इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करते बीत जाता है। लेकिन अब इस सारे झंझट से आजादी मिल जाएगी। अब आपको अपने मोबाइल को चार्ज करने की जरुरत नहीं पड़ेगी।

कैलिफोर्निया की एक कंपनी ने ऐसा बैटरी बनाया है जिसे एक बार फुल चार्ज करने पर उसे 28 हजार साल तक चार्ज करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। यानी अगर ये बैटरी फोन या घड़ी में लग जाए तो वो 28 हजार साल तक डिस्चार्ज नहीं होंगे।

ये बैटरी बनाई है NDB कंपनी ने। इसे ख़ास तरीके से बनाया गया है। इस बैटरी को एक आर्टिफिशियल डायमंड के छोटे से बॉक्स में कार्बन 14 न्यूक्लियर वेस्ट में फंसाकर बनाया गया है।

इसे सेल्फ चार्जिंग बैटरी भी कहा जाता है। इसे बनाने वाली कंपनी का कहना है कि इससे कई तरह के इक्विपमेंट्स इससे चलाए जा सकते हैं। इस बैटरी से फोन, घड़ी, लैपटॉप, कैमरा, मॉनीटर्स के अलावा कई तरह के इलेक्ट्रिक उपकरण चल सकते हैं।

कंपनी का दावा है कि ये बैटरी पूरी तरह सुरक्षित है। इसके ऊपर रेडियोएक्टिव हीरे से एक लेप लगाया गया है, जिसकी वजह से ये लीक नहीं होगा। बैटरी के अंदर ही बिजली स्टोर होगी। ऐसा इसमें लगे हीरे और कार्बन के रिएक्शन से होगा।

कंपनी का अगला टारगेट इसकी उम्र को और ज्यादा बढ़ाना है। 28 हजार साल से भी ज्यादा चलने वाले इस बैटरी से लोगों को काफी फायदा होगा। अगर इस बैटरी को कंप्यूटर चिप्स में लगा दिया जाए तो इससे काफी फायदा होगा।

कंपनी ने इसका भी दावा किया है कि इस बैटरी से लोगों को बिजली भी मिल सकेगी। इस बैटरी के जरिये लोग अपने घरों में बिजली कनेक्शन को बहाल कर पाएंगे।

कंपनी ने ना सिर्फ घरेलू बल्कि मेडिकल जगत में भी इस बैटरी के उपयोग को लेकर जरुरी बताया है। उनका कहना है कि पेसमेकर और ट्रांसप्लांट बैटरी पर चलती है। लेकिन इन्हें बार-बार बदलना पड़ता है। लेकिन अगर इनमें ये बैटरी लगा दिया जाए तो ऐसा करने की नौबत नहीं पड़ेगी।

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