भगवान शिव और विष्णु के बीच हुए भयानक युद्ध का क्या कारण था ?

यह बहुत ही प्रलय कारी युद्ध था जो महादेव और विष्णु के मध्य लड़ा गया था बात उस समय की है जब विष्णु जी लक्ष्मी जी से नाराज होकर कहीं चले गए थे। ये मामला शुरू होता है एक प्रश्न से।

और वो प्रश्न था, “क्या आपके संपूर्ण हृदय में केवल मैं रहती हूँ? मुझे विश्वास दिलाइये?”

विष्णु जी का विष्णु जी का जवाब था, “देवी आप तो जानती ही हैं की मेरे हृदय के आधे भाग में केवल महादेव यानि शिव विराजते हैं और शेष भाग में संपूर्ण मानव जाति जीव जंतु और आप का स्थान है फिर मैं कैसे कह दूं कि मेरी ह्रदय का संपूर्ण भाग आपके लिए ही है”।

विष्णु जी का जवाब सुनकर लक्ष्मी जी को गुस्सा आ जाता है। उन्होंने कहा की “मेरे संपूर्ण हृदय में तो केवल आप हैं तो आपके संपूर्ण ह्रदय में मैं क्यों न हूँ अगर संपूर्ण ह्रदय में स्थान नहीं देना तो तो अपने ह्रदय के बाकी हिस्से से भी मुझे निकाल दीजिए।”

और इस तरफ लक्ष्मी जी की ही पांच बहने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही थी

उनकी तपस्या पूर्ण होने वाली थी जिसके कारण भगवान विष्णु को उन पांचों बहनों को की तपस्या का फल देने के लिए पाताल लोक जाना पड़ा।

उन पांचों बहनों ने या वरदान मांगा कि भगवान विष्णु अपनी सारी स्मृति भूल कर उनके साथ पाताल लोक में ही रहे। माता लक्ष्मी द्वारा कहे गए उन कटुक शब्दों के कारण भगवान विष्णु ने उन पांचों बहनों को तथास्तु का वरदान दे दिया।

जिसके कारण पर अपनी सारी झूठी भूल गए और संसार से उनके पालनहार छीन गए। जब लक्ष्मी जी को उनकी गलती का एहसास हो तब वह महादेव के पास गई और महादेव, विष्णु को वापस ले जाने के लिए पाताल लोक आते हैं।

यहां महादेव और भगवान विष्णु में महाप्रलय कारी युद्ध होता है।

दोनों ही देव अपने-अपने स्त्रोत का प्रयोग करते हैं अंत में भगवान विष्णु अत्यधिक क्रोधित होकर अपना नारायणास्त्र, शिव पर चला देते हैं और महादेव अपना पशुपास्त्र, भगवान विष्णु पर चला देते हैं

परिणाम यह होता है कि दोनों ही बंधक बन जाते हैं ऐसी स्थिति को देख उन पांचों बहनों ने भगवान विष्णु से अपना वरदान वापस मांगा और सृष्टि को सर्वनाश होने से बचा लिया

और इस संसार को उनके पालनहार अर्थात भगवान विष्णु वापस मिल गए।

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