भगवान शिव को शिव क्यों कहा जाता है, शिव का क्या अर्थ होता है?

महाभारत अनुशासन पर्व के अध्याय १६१ मे कृष्ण पांडवो से महादेव की महिमा का वर्णन करते हुए यह कहते हैं —

उनमें महत्‍व और ईश्वरत्‍व होने के कारण वे ‘महेश्‍वर’ कहलाते हैं। वे जो सबको दग्‍ध करते हैं, अत्‍यन्‍त तीक्ष्‍ण हैं, उग्र और प्रतापी हैं, प्रलयाग्निरूप से मांस, रक्‍त और मज्‍जा को भी अपना ग्रास बना लेते हैं; इसलिये ‘रुद्र’ कहलाते हैं। वे देवताओं में महान हैं, उनका विषय भी महान है तथा वे महान विश्व की रक्षा करते हैं; इसलिये ‘महादेव’ कहलाते हैं अथवा उनकी जटा का रूप धूम्र वर्ण का है, इसलिये उन्‍हें ‘धूर्जटि’ कहते हैं। सब प्रकार के कर्मों द्वारा सब लोगों की उन्‍नति करते हैं और सबका कल्‍याण चाहते हैं; इसलिये इनका नाम ‘शिव’ हैं।

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