भगवान शिव सबसे बड़े देव होते हुए भी भगवान श्री राम का ध्यान क्यों करते हैं?

यह आपसे किसने कह दिया? क्या भगवान स्वयं प्रकट होकर किसी को यह बात बता कर गए थे?

क्या आपने रामेश्वरम का नाम सुना है, जहां श्री राम ने समुद्र पार करने से पहले शिवलिंग का निर्माण कर भगवान शिव का कई दिनों तक पूजन किया था।

रामेश्वरम का संधि विच्छेद करें तो प्राप्त होगा- राम के ईश्वर।

श्री कृष्ण और पांडवों ने महाभारत युद्ध से पहले शिव का पूजन किया था, यहाँ तक श्री कृष्ण ने वृन्दावन में गोपेश्वर महादेव मंदिर स्थापित किया था। जिसका अर्थ गोपाल के ईश्वर।

स्वयं विष्णु जी ने सहस्त्र वर्षों तक कमल के पुष्पों से शिव की कठिन तपस्या की और परीक्षा में पुष्प की जगह अपनी आंख चढ़ा दी थी इसीलिए उनका नाम कमल नयन पड़ा।

परशुराम जी शिव के अनन्य भक्त थे ये सभी को ज्ञात है।

कहने का तात्पर्य है कि विष्णु जी और उनके सभी अवतारों ने शिव की भक्ति की है जिनका वर्णन पुराणों और ग्रंथों में अवश्य मिलता है।

शिव जी ने विष्णु जी के सभी अवतारों के पृथ्वी पर आकर दर्शन किये और प्रशंसा भी की है, साथ ही अपना एक रुद्रावतार भी सहायता के लिए जरूर भेजा है।

राम नाम का एक अर्थ कुंडलिनी योग के साधक भी भली भांति जानते हैं। अतः राम नाम की साधना अपने आप मे ही बहुत शक्तिशाली है। परंतु हम सभी जानते हैं कि शिव से बड़ा योगी कोई नही, वे सबके गुरु हैं। शिव और शक्ति से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई, उन्होंने सभी ग्रह एवं मंत्रों की रचना की और कलियुग की शुरुआत से पहले सभी मंत्र कीलित किये। क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि शिव ही एकमात्र ऐसे देव हैं जिनको शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है नाकि मूर्ति रूप में। इसलिए ये कहना कि वे सिर्फ एक नाम या मंत्र का ध्यान करते हैं पर्याप्त नही।

ये सब टी वी धारावाहिकों द्वारा फैलाई गई भ्रांतियां हैं जो अपनी स्टोरी को उलट पलट कर कहीं भी कुछ भी जोड़ देते हैं, उनके मूलश्रोत के बारे में भी कुछ कहा नही जा सकता। परंतु लोग जो देखते सुनते हैं उसी को आंख बंद करके सच मान लेते हैं और उसका प्रचार भी करते हैं। दरअसल आपके उपरोक्त प्रश्न के संबंध में किसी भी वेद, पुराण में कोई जिक्र नही मिलता।

वेंदो में सूर्य, अग्नि, एवं इंद्र का बहुत बड़ा स्थान है और त्रिदेवों में महादेव का इसमे कोई संशय नही।

मेरा सभी पाठकों से अनुरोध है कि कृपा करके किसी भी देवताओं की उन्ही के अवतारों से तुलना न किया करें। इसके बजाय आपको ये समझना चाहिए कि उस अवतार का उद्देश्य क्या था और समाज को उनसे क्या सीख लेनी चाहिए।

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