भारतीय टीम के कुछ अंडररेटेड खिलाड़ी कौन – कौन हैं ?

वैसे तो भारत के बहुतेरे क्रिकेटर्स अंडर रेटेड रहे है , लेकिन मैं बात करूंगा उनमें से सिर्फ 3 के बारे में –

उसमे पहला नाम आता है पार्थिव पटेल का :-

पार्थिव ने अपने टेस्ट कॅरियर की शुरुआत मात्र 17 साल 152 दिन की अवस्था में इंग्लैंड के खिलाफ की जब उस समय के नियमित विकेटकीपर अजय रात्रा चोटिल हो गए थे ( ये किसी भी विकेटकीपर बल्लेबाज का सबसे कम उम्र में टेस्ट पदार्पण था )

17 साल का किशोर जिसने घरेलू क्रिकेट भी ना के बराबर ही खेला था , सौरभ गांगुली , सचिन और द्रविड़ के बीच मिसफिट सा ही लगता था।

एकदिवसीय क्रिकेट की शुरूआत इन्होंने 2003 में न्यूजीलैंड के खिलाफ की। हालांकि एकदिवसीय से ज्यादा वो टेस्ट मैचों में सफल रहे और 2003 – 04 में पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध कुछ अच्छी पारियां खेली। टेस्ट मैचों में इनका ओवरऑल औसत भी 30 के आसपास रहा जो कि 7वें नम्बर पर बल्लेबाजी करने वाले एक विकेटकीपर बल्लेबाज के लिए अच्छी मानी जा सकती है। लेकिन जैसा कि नाम से ही विदित है एक विकेटकीपर बल्लेबाज का पहले एक उत्तम कोटि का विकेटकीपर होना ज्यादा जरूरी है। पार्थिव की विकेटकीपिंग कभी भी औसत से ऊपर की नही रही और नतीजतन उन्हें टीम में अपना स्थान गंवाना पड़ा।

आपमें से बहुतों को ये पता नही होगा कि पार्थिव के बाएं हाथ में सिर्फ 4 अंगुलियां थी , और ऐसे में कुंबले और भज्जी के सामने विकेटकीपिंग करना वास्तव में एक चुनौतीपूर्ण कार्य था।

मेरी लिस्ट में दूसरा नाम आता है दिनेश कार्तिक का :-

पार्थिव के टीम से बाहर होने के पश्चात कार्तिक को 2004 में इंग्लैंड के खिलाफ टीम में जगह बनाने का मौका मिला। पार्थिव से हटके कार्तिक की विकेटकीपिंग अव्वल दर्जे की थी। लेकिन कॅरियर के शुरुआती दौर में कार्तिक बल्लेबाजी में उस लेवल की मैच्योरिटी नही दिखा पाए और टीम से अपना स्थान गंवा बैठे। उसके बाद धोनी का प्रार्दुभाव हुआ और फिर तो कार्तिक को टीम में तभी जगह मिलती थी जब या तो धोनी चोटिल हो या फिर उन्हें कुछ मैचों के लिए विश्राम दिया जाता।

हालांकि घरेलू क्रिकेट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के कारण उन्हें कुछ साल बाद दुबारा टीम में जगह मिली और अपने कॅरियर के दूसरे फेज में इन्होंने अपेक्षाकृत अच्छी बल्लेबाजी की। निदहास ट्रॉफी के फाइनल में उनकी 8 गेंदों पर 29 रन की पारी को भला कौन क्रिकेटप्रेमी भुला सकता है।

अन्य कई विकेटकीपर बल्लेबाजों की तरह कार्तिक के करियर पर भी धोनी नाम का ग्रहण लगा लेकिन बेशक वो धोनी के बाद दूसरे नम्बर के अच्छे विकेटकीपर बल्लेबाज रह चुके है।

जहाँ तक आईपीएल की बात है ये 2018 से लेकर मध्य 2020 तक कोलकाता नाईट राइडर्स के कप्तान थे और अभी भी KKR को अपनी सेवाएं दे रहे है।

मेरी लिस्ट में तीसरा नाम आता है अमित मिश्रा का :-

कॅरियर के शुरुआती दौर में इन्हें टीम में जगह बनाने के बीच में अनिल कुंबले और भज्जी चट्टान की तरह खड़े रहे। 2003 में एकदिवसीय पदार्पण के बावजूद इन्हें टेस्ट टीम में तब तक टीम में आने का मौका नही मिला जब तक कि कुंबले ने सन्यास नही ले लिया। कुंबले के रिटायरमेंट के बावजूद हरभजन के बाद दूसरे विकल्प हमेशा मुरली कार्तिक रहे। कार्तिक के खराब प्रदर्शन के बाद जब इन्हें कुछेक मैच में भज्जी के साथ मौका मिला तब तक अश्विन का उद्भव हो चुका था।

हरभजन की प्रदर्शन में गिरावट होने के बाद जडेजा ने अंतर्राष्ट्रीय पटल पर अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी। अब इससे ज्यादा किसी की किस्मत दगाबाज नही हो सकती ???

हालांकि अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में जो भी सीमित अवसर मिले , उसे मिश्रा जी ने बखूबी भुनाया। एक बेहतरीन गेंदबाज होने के अलावा मिश्रा जी निचले क्रम के उपयोगी बल्लेबाज भी थे।

लेकिन जो सफलता इन्हें आईपीएल में मिली वो अभूतपूर्व मानी जा सकती है।

मिश्रा जी आईपीएल इतिहास के एकमात्र गेंदबाज है , जिन्होंने 3 बार हैट्रिक लेने का कारनामा किया है।

जैसा कि उत्तर के शुरू में मैंने मेंशन किया है कि कई सारे भारतीय क्रिकेटर अंडररेटेड रह चुके है तो कम से कम उनके नाम का उल्लेख करना तो बनता ही है।

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