भारत का सबसे पुराना मंदिर कौन सा है, जिसमें दक्षिण भारत भी शामिल है? इसकी खोज कैसे हुई?

भारत का इतिहास बहुत पुराना है और ऐसा ही हिंदू धर्म या सनातन धर्म का इतिहास है जिसके साथ मंदिर जुड़े हुए हैं। मंदिरों का निर्माण लगभग 2000 साल पहले शुरू हुआ था। लेकिन भारत के सबसे पुराने मंदिर का जवाब पाने का सवाल थोड़ा मुश्किल है। प्रत्येक मंदिर जिसे सबसे पुराना माना जाता है उसी समय कोई न कोई समुदाय दावा कर देता है कि उनका मंदिर सबसे पुराना है।

पूजा और मंदिर के ढाँचे भी भारत और उसके समुदायों के साथ विकसित हुए हैं। पहले हिन्दू गुफा मंदिरों की पूजा करते थे, इसलिए मंदिरों का निर्माण करने की कोई जरूरत नहीं थी। लोग इन गुफाओं का अपने मृतकों को दफनाने के लिए इस्तेमाल करते थे, जिसे वह बड़े गोल पत्थरों से ढंकते थे। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के साथ, चैत्य की गुफाएं अस्तित्व में आईं, यह तब पूजा की जगह थीं। लेकिन मनुस्मृति के साथ इसका अंत हो गया था, जिस पर अधिकांश हिन्दू रूढ़िवाद आधारित हैं। यह मंदिरों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश जैसे देवताओं की पूजा करने की परंपरा लाया। तो लोगों ने गुफा मंदिरों में इन देवताओं की पूजा करनी शुरू कर दी। इस प्रकार का सबसे पहला उदाहरण एक गुफा मंदिर था जिसे 400 ईस्वी पूर्व में बनाया गया था। इसमें भगवान इंद्र और सूर्य के साथ परशुराम की छवियां हैं।

इसके बाद पत्थर के मंदिरों की बारी आई, क्योकि इनमें ईंट और लकड़ी शीघ्र ही नष्ट होने वाली सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। समय के साथ भारत के कई भागों में विभिन्न शैलियों और देवताओं की पूजा शैलियों से जुड़ी हुई है। अब हिंदूओं के मंदिरों की शैली एकसमान नही है नहीं बल्कि विभिन्न शैलियां हैं। दक्षिण भारत के मंदिर उत्तर भारत के मंदिरों से अलग थे। इस्लामी आक्रमणों ने भारत के विशेषकर उत्तर भारत के कई मंदिरों का विनाश कर दिया, इसलिए भारत में सबसे पुराना मंदिर साबित करने का दावा अधिक कठिन हो गया। यह आक्रमण 1200 ईस्वी से 1700 ईस्वी के बीच हुए। इस वजह से दक्षिण भारत में मंदिर अभी भी बरकरार हैं और शायद सबसे पुराने मंदिरों में से एक हैं।

तमिलनाडु के तटीय इलाके में 2004 की सुनामी के बाद चेन्नई से लगभग 60 किलोमीटर दूर महाबलीपुरम के पास दो मंदिर प्रकाशित हुए थे। यह पता चला है कि एक पल्लव मंदिर लगभग 800 साल पुराना है, जबकि इसका आधार 2000 वर्ष पुराना है।

फिर गुजरात के पश्चिमी राज्य में जगतमन्दिर मंदिर है जहाँ कुछ पुराने हिस्से हैं। इसका 413 ईस्वी में गुप्त शासन के दौरान पुननिर्माण किया गया था।

कुछ लोग मुंडेश्वरी मंदिर को भारत का सबसे पुराना मंदिर मानते हैं जो बिहार के कैमूर जिले में स्थित है। यह भारत का सबसे पुराना मंदिर है जो अभी भी श्रद्धालुओं के लिये खुला है। भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण ने इसे बहाल कर दिया है और इसका निर्माण संभवतः 108 ईस्वी दिनांकित है। तब से इस मंदिर में उसी भक्ति के साथ पूजा की जा रही है। मुंडेश्वरी मंदिर भगवान शिव और देवी शक्ति के लिए समर्पित है। मंदिर में भगवान गणेश, विष्णु, सूर्य और माता देवी जैसी अन्य मूर्तियां भी हैं।

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