भारत की कौन सी नदी का हर पत्थर शिवलिंग होता है ?

नर्मदा का हर कंकर है शंकर

नर्मदा, जिसे रेवा के नाम से भी जाना जाता है, मध्य भारत की एक नदी और भारतीय उपमहाद्वीप की पांचवीं सबसे लंबी नदी है। ग्रंथों में नर्मदा को भारत की पवित्र नदी माना जाता है। मान्यता है कि जो फल गंगा नदी में स्नान से मिलता है, वही फल नर्मदा नदी के दर्शन मात्र से प्राप्त होता है। इसका उल्लेख वेद और पुराणों में भी मिलता है। नर्मदा से निकला हर कंकड़ भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। नर्मदा से निकले शिवलिंग को नर्मदेश्वर भी कहा गया है।

नर्मदा से निकलने वाले पत्थर शिवलिंग के आकार के होते हैं। माना जाता है कि शिव के वरदान के कारण नर्मदा नदी से प्राप्त होने वाले शिवलिंग को पवित्र माना गया है। विश्व भर में यहां से निर्मित शिवलिंग को सीधा ही स्थापित किया जाता है, इनके प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती है। कहा जाता है कि, जहां नर्मदेश्वर का वास होता है, वहां काल और यम का भय नहीं होता है।

नर्मदा नदी का उल्लेख स्कंद पूराण में किया गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि यहां से ॐ लिखे हुए शिवलिंग भी निकले हैं। जिसे देखने दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। यहां की खास बात ये भी है कि नर्मदा नदी देश की एक ही ऐसी नदी है जो पूर्व से पश्चिम की ओर उल्टी दिशा में बहती है।

(पुरातत्व के जानकार प्रो. अरुण शुक्ला का कहना है कि नर्मदा का प्रवाह जमीन के नीचे की तरफ है। उसका पानी चट्टानों का घर्षण करते हुए बहता है। इसी घर्षण व पानी में लगातार लुढ़कने की वजह से नर्मदा के पत्थर गोल हो जाते हैं। इनके पत्थरों में अद्भुत धारियां यानी प्राकृतिक संरचनाएं भी पाई जाती हैं |

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