भीष्म पितामह 58 दिन तक बाणों की शैय्या पर लेटे रहे थे, क्या आप इसके पीछे का कारण जानते हैं?

भीष्म पितामह ने श्रीकृष्ण से पूछा था कि “हे प्रभो! मुझे अपने सौ जन्म स्मरण हैं, और उनमें मैने कोई भी ऐसा पाप नहीं किया है जिसके कारण मुझे शरशय्या पर लेटना पड़ रहा है। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें सौ जन्मों से आगे की दृष्टि प्रदान की। तब भीष्म पितामह ने उसका कारण जाना।

उसके अनुसार भीष्म पितामह एक राजा थे और वे रथारूढ़ होकर दल-बल के साथ कहीं जा रहे थे। मार्ग में एक सर्प पड़ा था। अतएव सैनिकों ने काफिला रोक दिया।

भीष्म को जब कारण पता चला तो उन्होंने सर्प को बाण की नोक से उठाकर कटीली गाड़ियों में फिंकवा दिया। वह सर्प वहाँ से निकलने की कोशिश में काँटों में बिंधता गया और फिर कई दिनों की असहनीय पीड़ा के बाद अंततः तड़प-तड़पकर मर गया। उसी पाप के परिणामस्वरूप भीष्म पितामह को 58 दिनों की शरशय्या मिली।

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