मच्छर मारने वाला रैकेट कैसे काम करता है? जानिए

1) बिजली की आपूर्ति यानी पॉवर सप्लाई सिस्टम एसी इनपुट को डीसी में परिवर्तित करती है जिससे कि बैटरी चार्ज होती है।

2) बैटरी ऑक्सिलेटर सर्किट को फीड करती है, जो डीसी को वापस एसी में परिवर्तित करती है।

3) एक ट्रांसफार्मर जो लो वोल्टेज को हाई वोल्टेज में परिवर्तित करता है, जिसे आगे डायोड / कैपेसिटर Ladder नेटवर्क (नीला) द्वारा आगे बढ़ाया जाता है।

मच्छर जब इसके पास आते हैं तो भीतर और बाहर के ग्रिड के बीच फंस जाते हैं। बाहर का ग्रिड सुरक्षा के लिए है ताकि मनुष्य अपनी उंगलियों या अन्य हिस्सों को अंदर होने से बच सकते हैं । बाहरी ग्रिड सर्किट को पूरा करने के लिए वापसी पथ के रूप में भी कार्य करता है। बाहरी ग्रिड में मच्छरों के अंदर जाने के लिए काफी बड़े छेद होते हैं। एक बार जब वे बाहर और आंतरिक ग्रिड दोनों को छूते हैं, तो एक उच्च वोल्टेज शॉर्ट सर्किट विकसित होता है और एक बड़ा शॉर्ट सर्किट करंट 1 सेकंड के अंश मात्र समय के लिए उनके बीच से गुजरता है, और मच्छर मर जाते हैं।

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