माँ छिन्नमस्तिका की साधना के लिए कौन सा मन्त्र करना चाहिए?

मंत्र, विधि सब बतलाई जा सकती है क्या आप तैयार है। साधना से जो भाव उत्पन्न होंगे उसे झेल पाएंगे।

छिन्नमस्तिका एक उग्र स्वभाव है देवी का। अपने अहंकार को त्यागने के लिए स्वयं का मुख विच्छेदित कर दिया। मुख अहंकार का द्योतक है। तत्पश्चात चेतना बनी हुई है।

छिन्नमस्ता की साधना इसे उद्देश्य से की जाना चाहिए कि अहंकार का पतन हो। इसके लिए कई दूसरे प्रयोजन है जी सामान्य व्यक्ति के लिए उपयुक्त हैं

जब तक ब्रह्म ग्रंथि को जाग्रत नही करेंगे तब तक छिन्नमस्ता की साधना बेकार है। अर्थात ।मनुष्य योनि के निम्नस्तर की आवयश्कता जैसे रहना, खाना, परिवार बढाना यह जब सहज हो जाये तब छिन्नमस्ता की साधना की तैयारी शुरू की जा सकती है।

कर्म कांड में बहुत सरल साधनाए उपलब्ध है पर परिणाम की कोई गारंटी नही

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