मेडिकल ऑक्सीजन क्या है? यह कैसे बनती है? इसकी कमी क्यों है? जानिए

मेडिकल ऑक्सिजन = ऑक्सिजन ९०% + नायट्रोजन ५% + औरंगोन ५% इन तीन वायु का मिश्रण होता हैं।

तीन वायु का मिश्रण ही क्यो? तीन वायु का मिश्रण मे प्रमाण आदी बारे मे तो डॉक्टर ही बाता पाएंगे।

विशेषता – तिनो वायु शुद्ध रूप मे होते हैं। वायु शुद्धता यांनी – आम हवा मे जो धूल के कण और प्रदूषण की वजहसे होणे वाले हानी कारक कण और कार्बन डाय ओकसाईड / नायट्रस ओकसाईड जैसे हानी कारक गॅस को पुरी तरहसे निकाल देते हैं।

हमारे वातावरण मे ऑक्सिजन होता हैं । वातावरण / सामान्य हवा को अनेक तराह की फिल्टर प्रणाली (छानने के लिये) से प्रवाहित करते हैं। इससे धूल कण और बाकी तैरने वाले जहरिले कण अलग हो जाते हैं।

अब इस छननी से गुजरी हवा को Adsorption Process प्रक्रिया प्रणाली मे भेजा जाता हैं।

Adsorption क्या होता हैं??

ये एक तरह के रसायन होते हैं जो हवा मेसे एक ही वायु को सोंख लेते हैं। इसके लिये विशिष्ठ तापमान और दबाव की जरूरत होती हैं।

तो ऑक्सीजन सोंख ने वाले Adsorption रसायन का ईस्तेमाल करके सिर्फ Oxygen का Adsorption करलेते हैं। यांनी रसायन मे अब सिर्फ Oxygen ही घुला राहता हैं।

अब Oxygen समहित Adsorption रसायन से Oxygen को बाहर निकालने के लिये दुसरी प्रक्रिया करते हैं।

इस प्रक्रिया पायदान पर अलग किया oxygen औद्योगिक ईस्तेमाल के लिये योग्य होता हैं।

फिर Oxygen 90% + Nitrogen 5% + Oregon 5%. का मिश्रण सिलिंडर मे भरदेते हैं।

नायट्रोजन को भी इसी तरहसे वातावरण से पाया जाता हैं। ओरगोन को विशेष प्रक्रिये से निर्माण करू लिया जाता हैं।

इसकी सारी मशीन देश मे ही बनती हैं। और हर बडे शहर मे / औद्योगिक केंद्र मे काई कम्पनिया इसे बनाती हैं।

फिर अब इसकी कमी क्यो?

मुख्य कारण इसकी मांग / जरूरत कोरोना महामारी की वजहसे (आम दिन की तुलनामे) चार गुना से ज्यादा हो गई हैं।

इसका एक व्यावहारिक कारण भी हैं। ये सारी कम्पनिया उद्योग क्षेत्र के लिये भी Oxygen और Nitrogen बनाती हैं। उद्योग क्षेत्र की मांग जादा होने से धंदा ठीक चलता हैं। कुछ कम्पनिया तो मेडिकल ऑक्सिजन नही बनाती हैं।

मेडिकल ऑक्सिजन बनाने के लिये अलगसे यंत्र प्रणाली लागनी पडती हैं। शुद्धता और मिश्रण बनाने केलीये।

फिर कोई बडे ३ -४ hospital से व्यापारी समझौते (contract) करने पडते हैं। तब कहीं जाकर इसकी खपत होती रहेगी।

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