मोदी जी दाढ़ी क्यों नहीं बना रहे हैं? जानिए

कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूदू से लेकर अमेरिकी नेता बेतो ओ’रुर्क तक दुनियाभर में नेताओं का दाढ़ी रखना या न रखना उनके बारे में खास संदेश देता रहा है. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफ़ेद दाढ़ी या काँग्रेस नेता राहुल गांधी का सफाचट चेहरा भी कुछ-न-कुछ कहता है.

एक समय था जब अमिताभ बच्चन हैरान हो गए थे कि दाढ़ी रखने के उनके फैसले पर कोई अखबार संपादकीय तक लिख सकता है. जी हां, यह दो दशक पहले की बात है. उनके वर्तमान और पूर्व राजनीतिक संरक्षक—नरेंद्र मोदी और गांधी परिवार (या उनके उत्तराधिकारी)— भी आज उतने ही हैरान होंगे कि इस कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अपनी छवि में जो बदलाव किया है उस पर सोशल मीडिया में इतनी चर्चा क्यों हो रही है.

प्रधानमंत्री मोदी की थोड़ी बढ़ी हुई दाढ़ी और बढ़ी हुई मूंछों को लेकर, जो नीचे से थोड़ी मुड़ी हुई नज़र आती हैं, ट्विटर पर दिलचस्प बातें लिखी जा रही हैं. कोई सलाह दे रहा है कि वे महाभारत के भीष्म की तरह लहराती दाढ़ी-मूंछ बढ़ा लें, तो किसी को उनमें छत्रपति शिवाजी की छवि दिख रही है. अमेरिकी लेखिका नोरा रोबर्ट्स ने कहा है, ‘ज़िंदगी एक मूंछ जैसी है. वह निराली भी हो सकती और भद्दी भी, लेकिन वह हमेशा गुदगुदाती है.’ ऐसा लगता है, मोदी की घनी मूंछें आज कई लोगों की कल्पनाओं को गुदगुदा रही हैं.

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